Q1. अभिहितान्वयवाद की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
- अभिहितान्वयवाद: कुमारिल भट्ट और प्रभाकर मीमांसक द्वारा प्रतिपादित वाक्यार्थबोध का सिद्धांत।
- पदार्थ पहले स्वतंत्र रूप से अभिहित (प्रकट) होते हैं, फिर वे आकांक्षा, योग्यता, सन्निधि से अन्वित (जुड़ते) होते हैं।
- प्रक्रिया: पदज्ञान → पदार्थस्मृति → पदार्थोपस्थिति → आकांक्षा-योग्यता-सन्निधि से अन्वय → वाक्यार्थबोध।
- आकांक्षा: एक पद के अर्थ से दूसरे पद के अर्थ की अपेक्षा; योग्यता: अर्थों में परस्पर संगति; सन्निधि: पदों की निकटता।
Answer: अभिहितान्वयवाद भारतीय साहित्यशास्त्र और व्याकरण दर्शन में वाक्यार्थ बोध से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है। यह सिद्धांत मुख्य रूप से मीमांसा दर्शन से संबद्ध है और इसके प्रमुख प्रतिपादकों में कुमारिल भट्ट के अनुयायी भट्ट मीमांसक तथा प्रभाकर मिश्र के अनुयायी प्राभाकर मीमांसक शामिल हैं। यह सिद्धांत इस मौलिक प्रश्न का उत्तर देता है कि किसी वाक्य का समग्र अर्थ (वाक्यार्थ) उसके अलग-अलग शब्दों (पदों) के अर्थों (पदार्थों) से किस प्रकार उत्पन्न होता है। इस सिद्धांत का मूल विचार यह है कि वाक्य म...