Q1. नागरिक समाज पर अरस्तू के विचारों का वर्णन कीजिए।
- अरस्तू ने 'नागरिक समाज' को आधुनिक अर्थ में अलग नहीं माना; उनके लिए 'पोलिस' राज्य और समाज का समागम था।
- उन्होंने मनुष्य को 'राजनीतिक प्राणी' (Zoon Politikon) बताया, जो 'पोलिस' में रहकर पूर्णता प्राप्त करता है।
- 'पोलिस' का लक्ष्य केवल जीवनयापन नहीं, बल्कि 'उत्तम जीवन' (Eudaimonia) और नैतिक उत्कृष्टता प्राप्त करना था।
- अरस्तू ने परिवार, गाँव और 'पोलिस' की पदानुक्रमित संरचना का वर्णन किया, 'पोलिस' उच्चतम समुदाय था।
Answer: अरस्तू ने 'नागरिक समाज' (civil society) शब्द का प्रयोग उस अर्थ में नहीं किया जिस अर्थ में यह आधुनिक राजनीतिक चिंतन में समझा जाता है। उनके लिए, समाज और राज्य के बीच कोई स्पष्ट विभाजन नहीं था; ये दोनों 'पोलिस' (Polis) नामक एक व्यापक अवधारणा में समाहित थे। अरस्तू के विचार मुख्य रूप से इस 'पोलिस' और इसमें व्यक्तियों के जीवन के इर्द-गिर्द घूमते हैं, जिसे वे मानवीय अस्तित्व की उच्चतम और सबसे पूर्ण अभिव्यक्ति मानते थे। अरस्तू ने मनुष्य को स्वभाव से एक 'राजनीतिक प्राणी' (Zoon Politikon) माना। इसका अर्थ...