Q1. पर्यावरण समाजशास्त्र (Environmental Sociology) के उद्भव का पता लगाएँ।
- पर्यावरण समाजशास्त्र 20वीं सदी के मध्य-उत्तरार्ध में पर्यावरणीय संकट की बढ़ती जागरूकता से उभरा।
- प्रारंभिक समाजशास्त्र का 'मानव असाधारणता प्रतिमान' (HEP) मानव को पारिस्थितिकीय सीमाओं से स्वतंत्र मानता था।
- रेचल कार्सन की 'साइलेंट स्प्रिंग' (1962) जैसी कृतियों ने पर्यावरणीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
- रिले डनलप और विलियम कैटन ने 'नया पारिस्थितिकीय प्रतिमान' (NEP) प्रस्तुत किया।
Answer: पर्यावरण समाजशास्त्र (Environmental Sociology) समाजशास्त्र का एक महत्वपूर्ण उप-अनुशासन है जो पर्यावरण और समाज के बीच जटिल अंतर्संबंधों का व्यवस्थित अध्ययन करता है। इसके उद्भव का पता 20वीं सदी के मध्य और उत्तरार्ध में लगे कई सामाजिक, वैज्ञानिक और बौद्धिक परिवर्तनों से लगाया जा सकता है। पारंपरिक समाजशास्त्र लंबे समय तक 'मानव असाधारणता प्रतिमान' (Human Exemptionalism Paradigm – HEP) से प्रभावित रहा। इस प्रतिमान के तहत यह माना जाता था कि मानव समाज अपनी उन्नत संस्कृति, प्रौद्योगिकी और सामाजिक संगठन ...