Q1. पूर्वोत्तर भारत में जातीय विविधता की चुनौती के समाधान हेतु राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्वायत्तता की भूमिका की विवेचना कीजिए।
- पूर्वोत्तर भारत की व्यापक जातीय विविधता (जनजातियाँ, भाषाएँ, संस्कृतियाँ) पहचान-आधारित संघर्षों को जन्म देती है।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व (जैसे आरक्षित सीटें) विभिन्न जातीय समूहों को विधायी निकायों में आवाज़ प्रदान करता है।
- स्वायत्तता, विशेषकर छठी अनुसूची के माध्यम से, आदिवासी क्षेत्रों को महत्वपूर्ण स्व-शासन शक्तियाँ देती है।
- स्वायत्त जिला परिषदें (ADCs) स्थानीय कानूनों, रीति-रिवाजों और संस्कृति के संरक्षण में सहायक होती हैं।
Answer: पूर्वोत्तर भारत अपनी असाधारण जातीय विविधता के लिए जाना जाता है, जिसमें सैकड़ों जनजातियाँ, भाषाएँ और संस्कृतियाँ शामिल हैं। यह विविधता क्षेत्र को समृद्ध करती है, लेकिन साथ ही इसने पहचान-आधारित आंदोलनों, संसाधनों पर प्रतिस्पर्धा और कभी-कभी जातीय संघर्षों को जन्म दिया है। इन चुनौतियों के समाधान के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्वायत्तता महत्वपूर्ण उपकरण रहे हैं। राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है कि विभिन्न जातीय समूह मुख्यधारा की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में शामिल हों। आरक्षित निर्वाचन क्षेत्...