Q1. भारतीय संविधान की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
- न्यायिक पुनरावलोकन: न्यायपालिका कानूनों की संवैधानिक वैधता जांचती है और उन्हें रद्द कर सकती है।
- मौलिक अधिकारों का संरक्षक: अनुच्छेद 32 व 226 के तहत नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है।
- मूल संरचना सिद्धांत: केशवानंद भारती मामले ने संसद की संशोधन शक्ति पर सीमा लगाई।
- संविधान का अंतिम व्याख्याकार: संवैधानिक प्रावधानों की आधिकारिक और अंतिम व्याख्या प्रदान करती है।
Answer: भारतीय संविधान ने न्यायपालिका को संविधान के संरक्षक, व्याख्याकार और प्रहरी के रूप में एक केंद्रीय भूमिका सौंपी है। इसका प्राथमिक कार्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के शासन के सभी अंग संविधान की सीमाओं और प्रावधानों के भीतर कार्य करें, जिससे लोकतंत्र और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके। न्यायपालिका का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपकरण न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति है। इसके तहत, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून या कार्यपालिका के किसी भी आदेश की संवैध...