Q1. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में दल प्रणाली की प्रकृति और विकास का विश्लेषण कीजिए।
- स्वतंत्रता के बाद 'कांग्रेस प्रणाली' ने भारतीय राजनीति पर 1967 तक प्रभुत्व जमाया, जहाँ कांग्रेस स्वयं में विपक्ष का कार्य करती थी।
- 1967 के बाद कांग्रेस प्रणाली का क्षरण हुआ, जिसके परिणामस्वरूप राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें और केंद्र में पहली बार जनता पार्टी का शासन (1977-79) आया।
- 1989 के दशक से गठबंधन राजनीति का युग शुरू हुआ, जहाँ किसी भी राष्ट्रीय दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ा।
- भारतीय दल प्रणाली बहुदलीय प्रकृति की है, जिसमें कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल विभिन्न सामाजिक-आर्थिक हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Answer: स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में दल प्रणाली ने एक जटिल और गतिशील प्रकृति का प्रदर्शन किया है, जिसमें समय के साथ महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। यह प्रणाली भारतीय समाज की विशाल विविधता और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को दर्शाती है। इसके विकास को मोटे तौर पर कई चरणों में विश्लेषित किया जा सकता है। प्रारंभिक चरण (1947-1967) को आमतौर पर 'कांग्रेस प्रणाली' के रूप में जाना जाता है। इस अवधि में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर राजनीतिक परिदृश्य पर हावी रहा। कांग्रेस एक छत्र संगठन ...