Q1. तनाव की प्रकृति, अवधारणा और महत्त्व पर चर्चा कीजिए।
- तनाव शरीर की किसी भी परिवर्तन की मांग के प्रति एक गैर-विशिष्ट प्रतिक्रिया है।
- यूस्ट्रेस सकारात्मक और प्रेरक तनाव है, जबकि डिस्ट्रेस नकारात्मक और हानिकारक होता है।
- तनाव एक व्यक्तिपरक, गतिशील, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक अनुभव है।
- तनाव मांगों और व्यक्ति की मुकाबला करने की क्षमताओं के बीच असंतुलन है।
Answer: तनाव आधुनिक जीवन का एक अपरिहार्य हिस्सा है जो हर व्यक्ति के जीवन को विभिन्न स्तरों पर प्रभावित करता है। बीपीएएस-186 पाठ्यक्रम में, तनाव को समझने के लिए इसकी प्रकृति, अवधारणा और महत्त्व का गहन विश्लेषण आवश्यक है। **तनाव की अवधारणा (Concept of Stress)** तनाव को आमतौर पर मानसिक या भावनात्मक खिंचाव या तनाव की स्थिति के रूप में समझा जाता है जो प्रतिकूल या अत्यधिक मांग वाली परिस्थितियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है। यह एक ऐसी प्रतिक्रिया है जो तब होती है जब किसी व्यक्ति को लगता है कि उस पर पड़ने ...