Q1. भारत में संवैधानिक प्रावधान किस प्रकार शैक्षिक अभिशासन को आकार प्रदान करते हैं? व्याख्या कीजिए। अपने उत्तर में प्रस्तावना के शैक्षिक निहितार्थों, शिक्षा से सम्बन्धित किन्हीं दो अनुच्छेदों (अनुच्छेद 21ए सहित) की परिचर्चा कीजिए और अपनी परिचर्चा को शिक्षा के अधिकार अधिनियम और एक सम्बन्धित सांस्थानिक तंत्र (उदाहरण के लिए, एन. सी.पी.सी.आर./एस.सी.पी.सी.आर.) से जोड़िये।
- भारत का संविधान शैक्षिक अभिशासन का आधार है, जो शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित करता है।
- प्रस्तावना के न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व के आदर्श शैक्षिक नीतियों और समान अवसरों को दिशा देते हैं।
- अनुच्छेद 21ए (86वाँ संशोधन, 2002) 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाता है।
- अनुच्छेद 45 (नीति निदेशक सिद्धांत) अब 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) पर केंद्रित है।
Answer: भारत का संविधान देश में शैक्षिक अभिशासन (educational governance) की नींव है, जो शिक्षा के अधिकार को मौलिक मानते हुए एक समावेशी और न्यायपूर्ण शैक्षिक प्रणाली की परिकल्पना करता है। यह संवैधानिक ढाँचा शिक्षा के सिद्धांतों, नीतियों और क्रियान्वयन को दिशा प्रदान करता है, जैसा कि BESC-132 पाठ्यक्रम में विस्तृत रूप से चर्चा की गई है। संविधान की प्रस्तावना, अपने आदर्शों – न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व – के माध्यम से शिक्षा के लिए गहरे निहितार्थ रखती है। 'न्याय' सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता...