Q1. 'कम्पनी शाश्वत उत्तराधिकार वाली और विधि द्वारा निर्मित एक कृत्रिम व्यक्ति है और जिस सदस्यों से यह बनती है उनके व्यक्तित्व से भिन्न होती है'। टिप्पणी कीजिए।
- कंपनी विधि द्वारा निर्मित एक कृत्रिम व्यक्ति है, जिसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता।
- यह कानून की नजर में संपत्ति धारण कर सकती है, अनुबंध कर सकती है और मुकदमा दायर कर सकती है।
- शाश्वत उत्तराधिकार का अर्थ है कि सदस्यों के आने-जाने या मृत्यु से कंपनी का अस्तित्व अप्रभावित रहता है।
- पृथक विधिक इकाई सिद्धांत कंपनी को उसके सदस्यों से कानूनी रूप से अलग व्यक्ति मानता है।
Answer: कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निगमित एक कंपनी की प्रकृति को वर्णित करते हुए दिया गया कथन इसकी आधारभूत विशेषताओं पर प्रकाश डालता है। यह कथन कंपनी के ‘कृत्रिम व्यक्ति’, ‘शाश्वत उत्तराधिकार’ और ‘सदस्यों से भिन्न व्यक्तित्व’ की अवधारणाओं को स्पष्ट करता है, जो इसे अन्य व्यावसायिक संगठनों से अलग करती हैं। कम्पनी विधि द्वारा निर्मित एक ‘कृत्रिम व्यक्ति’ है। इसका अर्थ है कि कंपनी का कोई भौतिक या प्राकृतिक अस्तित्व नहीं होता, बल्कि यह केवल कानून की नजर में एक व्यक्ति के रूप में पहचानी जाती है। एक प्राकृतिक...