Q1. भावना से आप क्या समझते है, विमर्श लिखिए।
- भावना मीमांसा दर्शन का केंद्रीय सिद्धांत है, जिसका अर्थ है 'उत्पन्न करना' या 'कार्य में प्रेरित करना'।
- शाब्दी भावना वैदिक आदेशों में निहित वक्ता की प्रेरणा है जो श्रोता को कार्य में लगाती है।
- आर्थी भावना कर्ता का फल प्राप्ति के लिए किया गया वास्तविक पुरुषार्थ या क्रियात्मक प्रयास है।
- शाब्दी भावना 'किं, केन, कथं भावयेत्' द्वारा प्रवृत्ति उत्पन्न करती है; आर्थी भावना फल प्राप्ति की प्रक्रिया समझाती है।
Answer: भावना (Bhāvanā) वैदिक अध्ययन परम्परा, विशेषकर मीमांसा दर्शन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मौलिक सिद्धांत है। यह शब्द 'भू' धातु से बना है, जिसका अर्थ है 'होना' या 'उत्पन्न करना'। अतः, भावना का शाब्दिक अर्थ 'उत्पन्न करना', 'प्रवृत्त करना' या 'कार्य में लगाना' होता है। यह एक ऐसी क्रिया है जो किसी वस्तु या कार्य को अस्तित्व में लाती है या किसी व्यक्ति को किसी कार्य के प्रति प्रेरित करती है। मीमांसा दर्शन में, भावना को विशेष रूप से वैदिक विधियों (आदेशों) की व्याख्या और उनके द्वारा उत्पन्न होने वाली प्...