Q1. अक्ष और संज्ञान सूक्तों का प्रतिपाद्य लिखिए।
- अक्ष सूक्त (ऋग्वेद 10.34) जुए की लत और उसके विनाशकारी सामाजिक-पारिवारिक प्रभावों का मार्मिक चित्रण करता है।
- अक्ष सूक्त का मुख्य उपदेश जुए को त्यागकर कृषि जैसे उत्पादक कार्यों (अक्षैर्मा दीव्यः कृषिं कृषस्व) में संलग्न होने का है।
- संज्ञान सूक्त (ऋग्वेद 10.191) सामाजिक, राष्ट्रीय और सार्वभौमिक एकता, सामंजस्य और सह-अस्तित्व की भावना प्रतिपादित करता है।
- संज्ञान सूक्त के प्रमुख मंत्र 'समानी व आकूतिः', 'समानो वो मनः' विचारों, हृदयों और मन की समानता पर बल देते हैं।
Answer: ऋग्वेद के दशम मंडल में समाहित अक्ष सूक्त (10.34) और संज्ञान सूक्त (10.191) वैदिक समाज के नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों को प्रतिपादित करने वाले अत्यंत महत्त्वपूर्ण सूक्त हैं। ये सूक्त जहाँ एक ओर व्यक्ति को सामाजिक बुराइयों से बचने का उपदेश देते हैं, वहीं दूसरी ओर समुदाय में एकता और सामंजस्य स्थापित करने का आह्वान भी करते हैं। इनका प्रतिपाद्य वैदिक ऋषियों की दूरदृष्टि और तत्कालीन समाज की आवश्यकताओं का परिचायक है। **अक्ष सूक्त (ऋग्वेद 10.34) का प्रतिपाद्य** अक्ष सूक्त ऋग्वेद के दशम मंडल का...