Q1. आरण्यक से आप क्या समझते हैं? आरण्यक साहित्य का वर्णन कीजिए।
- आरण्यक शब्द 'अरण्य' (वन) से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ है 'वन में रचित या पढ़ा जाने वाला ग्रंथ'।
- ये वैदिक साहित्य के श्रुति भाग हैं, जो ब्राह्मण ग्रंथों और उपनिषदों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं।
- आरण्यक कर्मकाण्ड की बाह्य क्रियाओं के स्थान पर उनके आंतरिक, प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक अर्थों पर केंद्रित होते हैं।
- इनमें रहस्य विद्या, उपासना, प्राण विद्या और ब्रह्मांड-पिंड संबंध जैसे गूढ़ दार्शनिक विषयों का विवेचन मिलता है।
Answer: वेद-वेदांग परिचय (MVS-001) पाठ्यक्रम के अनुसार, आरण्यक वैदिक साहित्य के महत्वपूर्ण भाग हैं जो ब्राह्मण ग्रंथों और उपनिषदों के मध्य एक सेतु का कार्य करते हैं। ये 'श्रुति' परम्परा का हिस्सा हैं और इनके नाम से ही इनकी प्रकृति और अध्ययन के वातावरण का बोध होता है। आरण्यक मुख्यतः कर्मकाण्ड की बाह्य क्रियाओं से हटकर उनके आंतरिक, प्रतीकात्मक और दार्शनिक रहस्यों पर केंद्रित होते हैं, जिससे ये उपनिषदों के गहन ज्ञानकाण्ड के लिए आधारभूमि तैयार करते हैं। आरण्यक शब्द 'अरण्य' से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'वन...