Q1. भाषा की प्रकृति और स्वरूप की विस्तृत चर्चा कीजिए।
- भाषा विचारों के आदान-प्रदान का यादृच्छिक एवं सांकेतिक माध्यम है।
- यह एक सामाजिक प्रक्रिया है, जिसका विकास और उपयोग समाज में होता है।
- भाषा निरंतर परिवर्तनशील और गत्यात्मक होती है, स्थिर नहीं रहती।
- भाषा में द्वैतता (Duality) होती है: अर्थहीन ध्वनियाँ और अर्थपूर्ण इकाइयाँ।
Answer: भाषा मानव सभ्यता के विकास और संप्रेषण का मूल आधार है, जिसके माध्यम से हम अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करते हैं। अनुवाद के संदर्भ में, भाषा की प्रकृति और स्वरूप को गहराई से समझना अनिवार्य है, क्योंकि यह हमें स्रोत भाषा के सूक्ष्म अर्थों और संरचनाओं को लक्ष्य भाषा में सफलतापूर्वक रूपांतरित करने में सहायता करता है। यह एक जटिल, बहुआयामी और निरंतर विकसित होने वाली प्रणाली है। **भाषा की प्रकृति (Nature of Language)** भाषा की प्रकृति उसके आंतरिक गुणों और विशेषताओं को संदर्भित करती है। इ...