MTT-045 Solved Assignment January 2025 | हिंदी-सिंधी के विविध क्षेत्रों में अनुवाद | IGNOU PGDSHST | IGNOUSolver
MTT-045 Solved Assignment — January 2025 / July 2025
हिंदी-सिंधी के विविध क्षेत्रों में अनुवाद | IGNOU PGDSHST (PGDSHST)
Download IGNOU PGDSHST MTT-045 solved assignment for the January 2025 session — हिंदी-सिंधी के विविध क्षेत्रों में अनुवाद. This paper contains 5 questions with 5 detailed solved answers including key points and references. Available in Hindi. Free PDF download for PGDSHST students.
AssignmentPGDSHST (PGDSHST)School of Interdisciplinary and Trans-disciplinary Studies
5
Total Questions
5
Answers Available
4
With Sub-parts
Available
Answer Status
Questions & Answers
Q1✓ AnswerLong Answer500 words
निम्नलिखित वाक्यों का सिंधी में अनुवाद कीजिए :
10 sub-questions
Q2✓ AnswerLong Answer200 words
निम्नलिखित शब्दों का सिंधी और हिंदी अर्थ लिखिए :
20 sub-questions
Q3✓ AnswerLong Answer200 words
कुछ शब्द ऐसे हैं जिनके सिंधी और हिंदी में समान पर्याय प्रचलित हैं। उदाहरण के लिए, उर्दूमूलक शब्द मेहमान सिंधी मिज़मान हिंदी अतिथि नीचे कुछ इसी प्रकार ...
20 sub-questions
Q4✓ AnswerLong Answer2100 words
निम्नलिखित अनुच्छेदों का सिंधी में अनुवाद कीजिए :
7 sub-questions
Q5✓ AnswerLong Answer300 words
निम्नलिखित अनुच्छेद का हिंदी में अनुवाद कीजिए :
Download Study Materials
Get all questions and answers in PDF for offline study.
Q1. निम्नलिखित वाक्यों का सिंधी में अनुवाद कीजिए :
1) हम सब आयोध्या जाने का कार्यक्रम बना रहे हैं। (50 words)
2) श्याम परीक्षा के लिए बड़ी मेहनत से पढाई कर रहा है। (50 words)
3) श्रीमती ज्योति नंदवाणी अध्यापिका हैं। (50 words)
4) क्या मेरे लिए कार्यालय से कोई पत्र आया है? (50 words)
5) आज मौसम बहुत सुहावना है। (50 words)
6) मैंने शाह लतीफ का संपूर्ण काव्य पढ़ लिया है। (50 words)
7) सामी के श्लोक वेदांत मत पर आधारित हैं। (50 words)
8) कोरोना का प्रकोप लगभग समाप्त हो गया है। (50 words)
9) भारतीय भाषा संस्थान मैसूर में है। (50 words)
10) क्या आप तमिल संगम साहित्य से परिचित हैं? (50 words)
Key Points:
सिंधी में प्रश्नवाचक वाक्य 'छा' से शुरू होते हैं।
कारक चिन्हों (जैसे 'जे', 'जो', 'जी', 'सां', 'मां', 'ते', 'लाड़ु') का सही प्रयोग महत्वपूर्ण है।
क्रियाओं का काल और लिंग-वचन के अनुसार उचित संयोजन आवश्यक है।
संज्ञाओं के लिए उचित सिंधी समकक्ष शब्द का चुनाव अनुवाद की सटीकता बढ़ाता है।
Answer: यह खंड हिंदी वाक्यों का सिंधी में सटीक और प्राकृतिक अनुवाद प्रस्तुत करता है, जैसा कि MTT-045 पाठ्यक्रम में अनुवाद कौशल पर जोर दिया गया है। अनुवाद करते समय, मूल वाक्य के अर्थ, व्याकरणिक संरचना और सांस्कृतिक बारीकियों को सिंधी भाषा की संरचना में ढालने का प्रयास किया गया है, ताकि अर्थ की शुद्धता और प्रवाह बना रहे। इसमें शब्दावली, क्रिया के रूप और वाक्य विन्यास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
Q2. निम्नलिखित शब्दों का सिंधी और हिंदी अर्थ लिखिए :
1) कारोबार (10 words)
2) हिभथ (10 words)
3) शानाइतो (10 words)
4) शाहूकार (10 words)
5) अमरु (10 words)
6) आसिरो (10 words)
7) अकुल (10 words)
8) जाहिल (10 words)
9) कीमती (10 words)
10) हलीमाई (10 words)
11) निविडत (10 words)
12) छमाही (10 words)
13) कुशादो (10 words)
14) काठु (10 words)
15) कशालो (10 words)
16) खथूरी (10 words)
17) डाडाणा (10 words)
18) मानवारो (10 words)
19) ज़ईफ (10 words)
20) ज़ाइफां (10 words)
Key Points:
सिंधी शब्दों के हिंदी अर्थों का सटीक अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
प्रत्येक शब्द के अर्थ को निर्धारित 10-शब्द सीमा में संक्षिप्त रखा गया है।
यह शब्दावली हिंदी-सिंधी अनुवाद कार्य के लिए आधारभूत ज्ञान है।
दिए गए शब्द विविध क्षेत्रों से संबंधित हैं, जो भाषाई क्षमता दर्शाते हैं।
Answer: इस खंड में, दिए गए सिंधी शब्दों के सिंधी रूप और उनके हिंदी अर्थ प्रस्तुत किए गए हैं। यह कार्य हिंदी-सिंधी अनुवाद के संदर्भ में शब्दावली की समझ को दर्शाता है। प्रत्येक शब्द का अर्थ संक्षिप्तता और सटीकता के साथ दिया गया है ताकि छात्रों को दोनों भाषाओं के बीच के संबंध को समझने में सहायता मिल सके।
Q3. कुछ शब्द ऐसे हैं जिनके सिंधी और हिंदी में समान पर्याय प्रचलित हैं। उदाहरण के लिए, उर्दूमूलक शब्द मेहमान सिंधी मिज़मान हिंदी अतिथि नीचे कुछ इसी प्रकार के शब्द दिए गए हैं। उनके सिंधी और हिंदी पर्याय लिखिए :
1) फर्दु (10 words)
2) शख़्सियत (10 words)
3) आलिमी (10 words)
4) जुनून (10 words)
5) जनाब (10 words)
6) नवाब (10 words)
7) शहंशाह (10 words)
8) हिफाज़त (10 words)
9) हक़मत (10 words)
10) झूनो (10 words)
11) पीरी (10 words)
12) हर्गिज़ (10 words)
13) काबिले तारीफ (10 words)
14) दाद (10 words)
15) फरियाद (10 words)
16) कुदरत (10 words)
17) फरिश्तो (10 words)
18) अदब (10 words)
19) खैरियत (10 words)
20) खुदाई (10 words)
Key Points:
सिंधी और हिंदी में कई शब्द फारसी-अरबी मूल के समान पर्याय साझा करते हैं।
प्रस्तुत शब्दों के सिंधी और हिंदी पर्याय उनके मूल अर्थ को दर्शाते हैं।
झूनो और पीरी जैसे कुछ शब्द स्वयं सिंधी मूल के हैं, जिनके हिंदी पर्याय दिए गए हैं।
यह अभ्यास हिंदी और सिंधी के बीच भाषाई आदान-प्रदान और समानता को उजागर करता है।
Answer: जैसा कि प्रश्न में उदाहरण दिया गया है, सिंधी और हिंदी भाषाओं में कई शब्द ऐसे हैं जिनके पर्याय समान रूप से प्रचलित हैं। ये शब्द अक्सर फारसी या अरबी मूल के होते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के सिंधी और हिंदी पर्याय उनके अर्थों के अनुरूप प्रस्तुत किए गए हैं।
Q4. निम्नलिखित अनुच्छेदों का सिंधी में अनुवाद कीजिए :
(क)) विदेश जाकर चित्रा तन-मन से अपने काम में जुट गई, उसकी लगन ने उसकी कला को निखार दिया। विदेशों में उसके चित्रों की धूम मच गई। भिखमंगी और दो अनाथ बच्चों के उस चित्र की प्रशंसा में तो अखबारों के कॉलम भर गए। शोहरत के ऊँचे कगार पर बैठ, चित्रा जैसे अपना पिछला सब कुछ भूल गई। पहले वर्ष तो अरुणा से पत्र–व्यवहार बड़े नियमित रूप से चला, फिर कम होते-होते एकदम बंद हो गया। पिछले एक साल से तो उसे यह भी नहीं मालूम कि वह कहाँ है। नई कल्पनाएँ और नए-नए विचार उसे नवीन सृजन की प्रेरणा देते और वह उन्हीं में खोई रहती। उसके चित्रों की प्रदर्शनियाँ होतीं। अनेक प्रतियोगिताओं में उसका 'अनाथ' शीर्षक वाला चित्र प्रथम परस्कार प्राप्त कर चुका था। जाने क्या था उस चित्र में, जो देखता, वही चकित रह जाता। दुख-दारिद्रय और करुणा जैसे उसमें साकार हो उठे थे। तीन साल बाद जब वह भारत लौटी तो बड़ा स्वागत हुआ उसका। अखबारों में उसकी कला पर, उसके जीवन पर अनेक लेख छपे। पिता अपनी इकलौती बिटिया की इस कामयाबी पर गदगद थे समझ नहीं पा रहे थे कि उसे कहाँ-कहाँ उठाएँ, बिठाएँ। दिल्ली में उसके चित्रों की प्रदर्शनी का विराट आयोजन किया गया। उद्घाटन करने के लिए उसे ही बुलाया गया था। उस प्रदर्शनी को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी, भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही थी और चित्रा को लग रहा था, जैसे उसके सपने साकार हो गए। उस भीड़-भाड़ में अचानक उसकी भेंट अरुणा से हो गई ! 'रूनी' ! कहकर वह भीड़ की उपस्थिति को भूलकर अरुणा के गले से लिपट गई 'तुझे कब से चित्र देखने का शौक हो गया, रूनी!' इसका उत्तर देते हुए उसने कहा, 'चित्रों को नहीं, चित्रा को देखने आई थी। तू तो एकदम भूल ही गई।' (300 words)
(ख)) इस बीच, राष्ट्रपति के आदेश से 1961 में 'वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग' की स्थापना हुई। आयोग ने अब तक तैयार की गई समस्त शब्दावली के पुनर्निरीक्षण तथा विविध विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की शब्दावली के निर्माण का काम अपने हाथ में ले लिया। आयोग ने सर्वप्रथम शब्दावली-निर्माण के मार्गदर्शक सिद्धांत तय किए और उस समय तक तैयार की गई शब्दावली का पुनरीक्षण करने के लिए विविध विषयों की विशेषज्ञ समितियाँ गठित कीं, जिनमें भारत के सभी भाषायी क्षेत्रों के उपलब्ध प्रतिष्ठित विद्वान तथा भाषाविद सम्मिलित किए गए। देश के प्रबुद्ध वर्ग में शब्दावली-निर्माण के प्रति चेतना जाग्रत करने के उद्देश्य से उक्त विशेषज्ञ सलाहकार–समितियों की बैठकें और संगोष्ठियाँ देश के विभिन्न भागों में आयोजित की गईं। आयोग ने पारिभाषिक शब्दावली के भाषावैज्ञानिक पक्ष पर विचार करने के लिए अलग से एक संगोष्ठी आयोजित की, जिसमें देश के सभी भाषायी क्षेत्रों के प्रमुख भाषाविदों ने भाग लिया। उन्होंने सभी भारतीय भाषाओं के लिए यथासंभव समान शब्दावली का निर्माण करने में उपस्थित होने वाली रूपात्मक, ध्वन्यात्मक और अर्थ संबंधी समस्याओं पर विचार करके अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं। अतः आयोग का प्रमुख कार्य ऐसी वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली का विकास करना था, जो थोड़े-बहुत संशोधन के साथ सभी भारतीय भाषाओं द्वारा प्रयोग में लाई जा सके। इसे पूरा करने के लिए आयोग को देश में उपलब्ध शब्दावलियों का संग्रह करने, उनमें समन्वय स्थापित करने, शब्दावली-निर्माण के सिद्धांत निश्चित करने और अनुमोदित शब्द-सूचियाँ प्रकाशित करने का दायित्व सौंपा गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय स्तर की संदर्भ-ग्रंथों और पुस्तकों की रचना एवं प्रकाशन का महत्वपूर्ण काम भी आयोग के कार्यक्षेत्र में रखा गया। इस प्रकार, हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के माध्यम से विज्ञान एवं तकनीकी विषयों के वैचारिक आदान-प्रदान और अध्ययन-अध्यापन को सुगम बनाने के लिए सभी संभव साधन जुटाना आयोग का दायित्व है।
Q5. निम्नलिखित अनुच्छेद का हिंदी में अनुवाद कीजिए :
Key Points:
अनुवाद के लिए स्रोत पाठ (Source Text) का होना अनिवार्य है।
MTT-045 में अनुवाद प्रक्रिया, रणनीतियों और सांस्कृतिक संदर्भों का अध्ययन होता है।
सफल अनुवाद के लिए मूल संदेश और संदर्भ की स्पष्टता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
शाब्दिक अनुवाद से बचकर प्रसंगानुकूल अर्थ और मुहावरों का ध्यान रखा जाता है।
Answer: प्रिय शिक्षार्थी,
दिए गए निर्देशों के अनुसार, 'निम्नलिखित अनुच्छेद का हिंदी में अनुवाद कीजिए' प्रश्न का उत्तर देने के लिए अनुवाद हेतु मूल अनुच्छेद (Source Paragraph) उपलब्ध नहीं कराया गया है। अनुवाद एक स्रोत पाठ (Source Text) के बिना संभव नहीं है।
यदि अनुवाद के लिए अनुच्छेद उपलब्ध होता, तो मैं IGNOU पाठ्यक्रम MTT-045 - हिंदी-सिंधी के विविध क्षेत्रों में अनुवाद में पढ़ाए गए सिद्धांतों और तकनीकों का पालन करता। इसमें अनुवाद की प्रक्रिया, पाठ के प्रकार (जैसे साहित्यिक, वैज्ञानिक, प्रशासनिक) के अनु...
(300 words)
(ग)) तुलसीदास भक्तिकाल की सगुण काव्यधारा के राम-भक्त कवि हैं। उनका जन्म संवत् 1589 (1532 ई.) में उत्तर प्रदेश के सोरों नामक रथान में हुआ। कहा जाता है कि उनका प्रारंभिक जीवन बड़ी कठिनाइयों में बीता। वे, बावा नरहरिदास के शिष्य थे और उन्हीं से राम कथा में दीक्षित हुए। तुलसीदास के लिखे हुए छोटे-बड़े बारह ग्रंथों का उल्लेख आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने किया है। इनमें प्रमुख हैं – दोहावली, कवितावली, गीतावली, रामचरितमानस और विनय पत्रिका। सभी रचनाओं में भावों की विविधता तुलसी की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने रामकथा के विविध प्रसंगों के माध्यम से पारिवारिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन के आदर्शों को लोगों के सामने रखा। तुलसी की भक्ति भावना, सीधी, सरल और साध्य है। राम उनके आदर्श हैं और मर्यादा पुरुष हैं। रामचरितमानस में तुलसी ने राम और शिव, दोनों को एक-दूसरे का भक्त दिखाकर वैष्णव और शैवों में समन्वय करने का प्रयास किया। राम कथा को लेकर संस्कृत और हिंदी में अनेक रचनाएँ हैं, परंतु भरत का जो रूप तुलसी ने दिखाया है, वह रघुवंश या वाल्मीकि रामायण में भी नहीं है। भावों की विविधता के साथ-साथ तुलसी की शैली में विविधता भी है। सूरदास की पद-शैली, चारणों की छप्पय, कवित्त, सवैया पद्धति, दोहा, नीति-काव्यों की भक्ति पद्धति और प्रेमाख्यानों की दोहा-चौपाई पद्धति आदि का सफल प्रयोग तुलसी ने अपनी रचनाओं में किया है। तुलसी ने अपने समय की दोनों साहित्यिक भाषाओं – अवधी और ब्रज का प्रयोग किया। मानस के अतिरिक्त अधिकांश रचनाओं की भाषा ब्रज है, जिस पर तुलसी का अद्भुत अधिकार है। (300 words)
(घ)) हम पहनने–ओढ़ने और सुख-सुविधाओं में कितने भी आधुनिक हो जाएँ पर स्त्रियों के प्रति सोच न जाने कब आधुनिक होगी। आज भी स्त्री भले ही कितनी विदुषी और कुशल हो जाए पर उसका परिचय ऐसा लगता है कि देह के आगे सारी खूबियाँ बौनी हो जाती हैं। शरीर आकर्षक न हो तो अंदर की खूबियों का महत्व न के बराबर होता है। यदि कोई हुनर प्रकाश में आ भी जाता है तो काफी मशक्कत के बाद। मैं लखनऊ शहर के गांधी भवन में एक पुस्तक के लोकार्पण के सिलसिले में गई हुई थी। वहाँ पर मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, अध्यक्ष और मुख्य वक्ता के रूप में अनेक विद्वान मंच पर आसीन थे तथा दर्शक दीर्घा में अनेक साहित्यकार और साहित्य-प्रेमियों का जमावड़ा था। समय था – मंच पर बैठे हुए लोगों का परिचय करवाने का। एक विद्वान टाइप के शख़्स दर्शक दीर्घा की आरक्षित पंक्ति से उठे और माइक पर सबका परिचय देने लगे। उन्होंने एक शायरी सुनाकर और करतल ध्वनि प्राप्त करके अपना काम (परिचय करवाने का) शुरू कर दिया। ‘ये हैं हिंदी संस्थान के कार्यकारी उपाध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि, ये हैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी के विभागाध्यक्ष, ये हैं साहित्य प्रेमी तथा अनेक पुस्तकों के रचयिता जो कि इस समय प्रशासनिक सेवा में....' अब बारी थी एक महिला के परिचय करवाने की, जो वर्धा से लखनऊ पधारी थीं। इनके परिचय में माइक सँभाले माननीय ने एक शायरी पढ़ी जोकि मुझे जस की तस याद तो नहीं पर उसका अर्थ कुछ यूँ था, 'पूरे शहर में कई चेहरों को देखा पर आपके गुलाब जैसा चेहरा कहीं नहीं पाया।' मैंने सोचा ये शख़्स आगे भी कुछ परिचय देंगे पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। उनकी इस शायरी पर खूब तालियाँ मिलीं। इसके बाद वे आगे बैठे किसी पुरुष विद्वान का विद्वता से भरा परिचय देने में लग गए। मैं यह जानने को उत्सुक थी कि मंच पर आसीन इस महिला का देह की सुंदरता के अलावा भी कुछ परिचय होगा, पर कोई जानकारी नहीं मिल पाई। (300 words)
(ङ)) आज का जीवन बहुत भाग-दौड़ वाला है। लोगों के पास समय की कमी है। ज़माना इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है कि यदि व्यक्ति उसके साथ कदम-से-कदम मिलाकर न चले, तो वह पिछड़ जाएगा। यही कारण है कि व्यक्ति कम-से-कम समय में अधिक-से-अधिक बातें जान लेना चाहता है। कार्यालय में अधिकारियों के पास इतना समय नहीं होता कि वे फाइलों और पत्रों को पूरी तरह से पढ़ें। वे कम-से-कम समय में अधिक-से-अधिक फाइलों और पत्रों को निपटा देना चाहते हैं। विशेष रूप से वह अधिकारी जिसने हाल ही में कार्यभार सँभाला है। उस व्यक्ति के पास इतना समय नहीं होता कि वह सभी फाइलें विस्तार से पढ़े, अतः वह अधीनस्थ अधिकारी/कर्मचारी को संबंधित फाइल की सामग्री का सार प्रस्तुत करने का आदेश दे देता है। इस तरह की स्थितियों में सार बहुत मददगार सिद्ध होता है। सार को पढ़कर अधिकारी तुरत-फुरत ढेर सारी फाइलें निपटा देता है। सार को पढ़कर व्यक्ति अपनी रुचि का समाचार, लेख या कहानी चुन लेता है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि 'सार' पूरी सामग्री के आधार पर तैयार किया गया वह मसौदा है, जो संक्षिप्त होते हुए भी सामग्री की सभी मुख्य बातों को अपने में समेटे होता है और जिसके आधार पर पूरी सामग्री को समझा जा सकता है। यहाँ आपके मन में प्रश्न उठ सकता है कि जब सार–संक्षेपण का इतना महत्व है और सारे काम सार के आधार पर ही चल सकते हैं, तो फिर मूल सामग्री की क्या आवश्यकता और महत्ता रहती है अर्थात फिर मूल विस्तृत सामग्री क्यों पढ़ी जाती है? इससे भी और आगे बढ़कर सब लोग सार ही क्यों नहीं लिखते अपनी बातें विस्तार से क्यों लिखते हैं? आपका ऐसा सोचना सही है, परंतु मूल सामग्री का अपना अलग महत्व होता है, जिसे किसी भी प्रकार से छोड़ा नहीं जा सकता। (300 words)
(च)) हमारी कल्पना पंख पसारती है और हमारे मन में जिन नए-नए भावों का संचार होता है उन्हें हम लिपिबद्ध करना चाहते हैं। अगर हमें शुद्ध लिखना आता ही नहीं तो हम अपने आपको अभिव्यक्त कैसे कर पाएँगे। इसके लिए हमें भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण और उसके बाद शब्द से परिचित होना होगा। अगर हम सही शब्दों का चयन नहीं कर पाते तो लिखते समय वर्तनी के गलत होने से अर्थ का अनर्थ हो जाता है। जैसे आपने कई लोगों को यह कहते सुना होगा कि 'आपने अस्नान किए कि नहीं'। यही बात वह लेखन में कर जाते हैं जोकि गलत है। कारण, 'अस्नान' की जगह उन्हें 'स्नान' शब्द लिखना चाहिए था। कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ 'स्थायी' को 'अस्थायी' की तरह उच्चारित किया जाता है, जबकि ऐसा लिखते समय अशुद्धि हो जाती है! इसी प्रकार का एक उदाहरण देखें – 'माँ का दूध बच्चे के लिए पूर्ण अहार होता है।' इस वाक्य में 'अहार' के स्थान पर 'आहार' लिखा जाएगा। कुछ लोगों की 'व' और 'ब' संबंधी अशुद्धियाँ भी लेखन में हो जाती हैं। 'वर्षा' को 'बर्षा' और 'वनस्पति' को 'बनस्पति' लिख जाते हैं। इसके अलावा 'श' 'ष', 'स' की अशुद्धि तो अधिकतर लागों से हो ही जाती है। वे 'शासन' को 'सासन', 'नमस्कार' को 'नमश्कार' और 'कष्ट' को 'कस्ट' लिख जाते हैं। 'ट' और 'ठ' के लेखन में भी खूब अशुद्धियाँ होती हैं। विशिष्ट के स्थान पर 'विशिष्ठ' और 'संतुष्ट' की जगह 'संतुष्ठ' लिखते हुए आपने कई लोगों को देखा होगा, जो कि गलत है। इसी तरह हमें 'क्ष' और 'छ' लिखते समय भी अशुद्धियों से बचना होगा। लोग 'क्षमा' के स्थान पर 'छमा' या 'छिमा' लिख देते हैं। और 'कक्षा' की जगह 'कच्छा' जबकि 'कच्छा' भिन्न अर्थ रखता है। इस तरह की अशुद्धियाँ बड़ी अशुद्धियों की श्रेणी में गिनी जाती हैं। (300 words)
(छ)) विषय : स्वायत्त संगठनों, सांविधिक नियमों एवं सरकारी उद्यमों के कर्मचारियों के लिए हिंदी प्रशिक्षण की व्यवस्था एवं पाठ्य-पुस्तकों की उपलब्धता के बारे में। मुझे इस विभाग के कार्यालय ज्ञापन सं. ई-12047/49/73-हिंदी दिनांक 17.9.1984 की ओर सभी मंत्रालयों/ विभागों का ध्यान आकर्षित करने का निदेश हुआ है। इस कार्यालय ज्ञापन में बताया गया है कि सभी स्वायत्त संगठनों, सांविधिक निकायों एवं सरकारी उद्यमों के हिंदीतर भाषी कर्मचारियों को हिंदी में काम करने के लिए हिंदी प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहिए। उनके लिए हिंदी प्रशिक्षण कार्यक्रम सरकारी कर्मचारियों की तरह चलाए जाने की अथवा हिंदी शिक्षण योजना के अधीन प्रशिक्षण केंद्र खोलने की व्यवस्था की गई है। समय-समय पर इस विभाग के ध्यान में यह लाया गया है कि संगठनों के कर्मचारियों को प्रशिक्षण के लिए पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पातीं, जिसके कारण उन्हें प्रशिक्षण प्राप्त करने में कठिनाई होती है। इस समस्या पर इस विभाग में विचार किया गया है। यह निर्णय लिया गया है कि प्रयोग के तौर पर सरकारी उद्यमों/स्वायत्त संगठनों तथा सांविधिक निकायों को फिलहाल तीन वर्ष के लिए अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए पाठ्य-पुस्तकें स्वयं मुद्रित कराने की अनुमति दे दी जाए, ताकि उन्हें पुस्तकें प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। वे कृपया मुद्रण के पश्चात निम्नलिखित जानकारी इस विभाग को उपलब्ध कराएँ : (क) हर पाठ्यक्रम की कितनी पुस्तकें मुद्रित हुई हैं? (ख) मुद्रित पुस्तकें कितनी-कितनी और किन-किन कार्यालयों में वितरित की गई हैं? (ग) पुस्तक के भीतरी पृष्ठ पर 'प्रबंधक, भारत सरकार मुद्रणालय, फरीदाबाद द्वारा मुद्रित, तथा नियंत्रक, प्रकाशन विभाग, दिल्ली द्वारा प्रकाशित' के स्थान पर चेयरमैन / मैनेजिंग डाइरेक्टर (उपक्रम/संस्थान का नाम) द्वारा अपने कर्मचारियों के हिंदी प्रशिक्षण के लिए मुद्रित' लिखा जाए। क.ख.ग. संयुक्त सचिव (राजभाषा) गृह मंत्रालय, भारत सरकार (300 words)
Key Points:
ترجمي ۾ سڌي طرح واري معنيٰ ۽ لکيل متن جي احساس کي برابر اهميت ڏني وئي آهي.
فني (Technical) ۽ ادبي (Literary) اصطلاحن جي سنڌي ۾ صحيح ۽ مناسب ترجمي تي خاص ڌيان ڏنو ويو آهي.
سرڪاري خط و ڪتابت ۽ آفيس ميمورنڊم جي ترجمي ۾ رسمي (Formal) ۽ سرڪاري ٻولي جو استعمال ڪيو ويو آهي.
ٻولي جي ننڍين غلطين (مثال طور املا، اچار ۽ لفظن جي چونڊ) جي اهميت کي اجاگر ڪيو ويو آهي ته ڪيئن اهي معنيٰ کي تبديل ڪري سگهن ٿيون.
Answer: यह उत्तर दिए وِج سوالن ۾ ڏنل هندي پيراگرافن جو سنڌي ۾ جامع ترجمو شامل آهي. هر پيراگراف کي سنڌي ٻولي جي گرامر، اصطلاحن ۽ لفظن جي صحيح استعمال سان ترجمو ڪيو ويو آهي، ۽ هر سب-سوال جي لاءِ ڏنل لفظن جي حد جي پيروي ڪئي وئي آهي. ترجمي ۾ هر پيراگراف جي اصل معنيٰ ۽ جذبي کي برقرار رکڻ جي ڪوشش ڪئي وئي آهي، جڏهن ته سنڌي ۾ قدرتي رواني کي يقيني بڻايو ويو آهي.