Q1. अध्यास का प्रयोजन एवं अध्यास की कारण सामग्री का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
- अध्यास आत्म-तत्त्व पर अनात्म वस्तुओं का भ्रमपूर्ण आरोपण है, जो अद्वैत वेदान्त का मूल सिद्धान्त है।
- अध्यास का मुख्य प्रयोजन जीव को संसार चक्र में बाँधना, द्वैत जगत का अनुभव कराना और लौकिक व्यवहार का आधार बनना है।
- यह जीव को कर्ता, भोक्ता बनाता है और सुख-दुःख के अनुभवों में लिप्त कर पुनर्जन्म का कारण बनता है।
- अध्यास की कारण सामग्री में मूल अज्ञान/अविद्या सबसे प्रमुख है, जो आत्मा के स्वरूप को ढँकती है।
Answer: अध्यास, अद्वैत वेदान्त दर्शन का एक मूलभूत सिद्धान्त है, जिसे शंकराचार्य ने अपने ब्रह्मसूत्र भाष्य के आरम्भ में 'अध्यास भाष्य' के रूप में विस्तृत किया है। यह एक प्रकार का आरोप या अधिष्ठान पर किसी अन्य वस्तु के गुणों का भ्रमपूर्ण आरोपण है, जहाँ एक वस्तु के धर्म को दूसरी वस्तु पर अधिरोपित किया जाता है। यह प्रश्न अध्यास के प्रयोजन और उसकी कारण सामग्री का विस्तारपूर्वक वर्णन करने को कहता है, जो जीव के बन्धन और मोक्ष की प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। **अध्यास का प्रयोजन (Purpose of Adhyasa)...