Q1. अथर्ववेद की प्रमुख शाखाओं का वर्णन करें।
- अथर्ववेद की पारंपरिक रूप से नौ शाखाएँ मानी जाती हैं।
- शौनकीय शाखा अथर्ववेद की सर्वाधिक प्रसिद्ध और अध्ययन की जाने वाली शाखा है, जिसमें 20 कांड और लगभग 760 सूक्त हैं।
- शौनकीय शाखा ऋषि शौनक से संबंधित है और इसका पाठ व्यवस्थित तथा व्यापक रूप से उपलब्ध है।
- पैप्पलाद शाखा अथर्ववेद की दूसरी प्रमुख जीवित शाखा है, जो ऋषि पिप्पलाद से संबंधित है।
Answer: अथर्ववेद, भारतीय वैदिक साहित्य का चौथा वेद है, जिसे प्रायः 'जादुई मंत्रों का वेद', 'अथर्वांगिरस वेद' या 'भैषज्य वेद' (चिकित्सा का वेद) के रूप में जाना जाता है। यह मुख्यतः लौकिक जीवन की समस्याओं, रोगों के निवारण, शत्रुओं पर विजय, धन-धान्य की प्राप्ति तथा गृहस्थ जीवन के सुख-समृद्धि से संबंधित मंत्रों और अनुष्ठानों का संग्रह है। परंपरा के अनुसार, अथर्ववेद की नौ शाखाएँ मानी जाती हैं, जैसा कि पतंजलि ने अपने महाभाष्य में 'नवधा अथर्वणो वेदः' कहकर उल्लेख किया है। हालांकि, इन नौ शाखाओं में से वर्तमान मे...