Q1. धर्म शब्द की उत्पत्ति और व्युत्पत्ति का वर्णन करते हुए धर्म के स्वरूप का विस्तारपर्दूक वर्णन करें।
- धर्म शब्द संस्कृत की 'धृ' धातु से उत्पन्न है, जिसका अर्थ 'धारण करना' या 'स्थिर रखना' है।
- यह वैदिक 'ऋत' की अवधारणा से विकसित हुआ, जो ब्रह्मांडीय और नैतिक व्यवस्था को संदर्भित करता था।
- धर्म बहुआयामी है, इसमें व्यक्तिगत आचरण, सामाजिक नियम और ब्रह्मांडीय सिद्धांत शामिल हैं।
- स्वधर्म व्यक्ति की स्थिति, वर्ण, आश्रम व गुण के अनुसार विशिष्ट कर्तव्यों को दर्शाता है।
Answer: भारतीय चिंतन परंपरा में, 'धर्म' एक अत्यंत मौलिक और व्यापक अवधारणा है, जो केवल किसी उपासना पद्धति तक सीमित न होकर जीवन के प्रत्येक पहलू का मार्गदर्शन करती है। यह व्यक्ति और समाज दोनों के लिए सदाचार, कर्तव्यपरायणता और समग्र कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। इसका गहन अध्ययन भारतीय सभ्यता और संस्कृति को समझने के लिए अनिवार्य है। **धर्म शब्द की उत्पत्ति और व्युत्पत्ति** धर्म शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत भाषा की 'धृ' धातु से हुई है। इस 'धृ' धातु का शाब्दिक अर्थ 'धारण करना', 'पोषण करना', 'समर्थन करना' ...