Q1. शैव दर्शन की परम्परा को स्पष्ट कीजिये ।
- शैव दर्शन की जड़ें वैदिक रुद्र और सिन्धु घाटी सभ्यता के पशुपति में हैं।
- शैव आगम, शैव मत के मूलभूत दार्शनिक और अनुष्ठानिक ग्रंथ हैं।
- पाशुपत शैव दर्शन सबसे प्राचीन है, जिसकी स्थापना लकुलीश ने की थी।
- शैव सिद्धान्त दक्षिण भारत का द्वैतवादी मत है, शिव, पशु, पाश को सत्य मानता है।
Answer: शैव दर्शन, भारतीय आध्यात्मिक परम्परा का एक महत्वपूर्ण और प्राचीन अंग है, जो भगवान शिव को परम सत्ता, ब्रह्मांड का निर्माता, पालक और संहारक मानता है। इसकी परम्परा अत्यंत विस्तृत, विविध और प्राचीन है, जिसके मूल वैदिक काल से लेकर सिन्धु घाटी सभ्यता तक खोजे जा सकते हैं। यह केवल एक धार्मिक सम्प्रदाय नहीं, बल्कि एक गहन दार्शनिक प्रणाली है जिसमें अनेक शाखाएँ और उपशाखाएँ विकसित हुई हैं। शैव परम्परा के बीज हमें वैदिक साहित्य में मिलते हैं, जहाँ रुद्र नामक देवता का उल्लेख है। रुद्र को विनाशक और कल्याणकार...