Q1. मीमांसा दर्शन की आचार-मीमांसा का विवेचन करें।
- धर्म वेद के आदेशों पर आधारित है, जो मीमांसा नैतिकता का मूल है।
- वेद ही नैतिक ज्ञान का एकमात्र प्रामाणिक स्रोत हैं (चोदना लक्षणोऽर्थो धर्म:)।
- कर्म चार प्रकार के होते हैं: नित्य, नैमित्तिक, काम्य, और निषिद्ध, जो नैतिक आचरण निर्धारित करते हैं।
- अपूर्व अदृश्य शक्ति है जो कर्म और उसके भविष्य के फल को जोड़ती है, ईश्वर की आवश्यकता नहीं।
Answer: मीमांसा दर्शन, भारतीय दर्शन की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो मुख्य रूप से वैदिक कर्मकाण्ड और धर्म के स्वरूप पर केंद्रित है। इसकी आचार-मीमांसा (ethics) धर्म के अवधारणा पर आधारित है, जिसे वेद द्वारा निर्धारित क्रियाओं के समुच्चय के रूप में समझा जाता है। मीमांसा के अनुसार, धर्म ही वह नैतिक नियम है जिसका पालन मनुष्य को करना चाहिए ताकि वह अभीष्ट फल प्राप्त कर सके और अनिष्ट से बच सके। मीमांसा दर्शन में, वेद को धर्म का एकमात्र प्रामाणिक स्रोत माना जाता है। किसी भी कार्य की धार्मिकता या अधार्मिकता का निर्ध...