Q1. सांख्य दर्शन के स्वरूप और परम्परा को स्पष्ट करते हुए इसके प्रमुख सिद्धान्तों की विस्तार से व्याख्या कीजिये ।
- सांख्य दर्शन द्वैतवादी, यथार्थवादी, और तार्किक है, पुरुष और प्रकृति को दो परम सत्य मानता है।
- यह सत्कार्यवाद का सिद्धांत प्रतिपादित करता है: कार्य अपने कारण में पहले से ही अव्यक्त रूप में विद्यमान होता है।
- पुरुष शुद्ध, निष्क्रिय चेतना है, जबकि प्रकृति जड़, सक्रिय, त्रिगुणमयी (सत्त्व, रजस्, तमस्) मूल कारण है।
- प्रकृति से 23 तत्वों (बुद्धि, अहंकार, मन, इंद्रियाँ, तन्मात्राएँ, महाभूत) की सृष्टि होती है।
Answer: सांख्य दर्शन भारतीय दर्शन की छह आस्तिक प्रणालियों में से एक है, जो अपने द्वैतवादी, यथार्थवादी और विशुद्ध रूप से तार्किक स्वरूप के लिए जाना जाता है। यह भारतीय चिंतन परंपरा के सबसे प्राचीन और प्रभावशाली दर्शनों में से एक है, जिसका लक्ष्य दुःख से मुक्ति प्राप्त करना है। जैसा कि पाठ्यक्रम MSK-033 में वर्णित है, सांख्य पद्धति विशुद्ध रूप से अनुभव और तर्क पर आधारित है। **सांख्य दर्शन का स्वरूप (Nature of Samkhya Philosophy)** सांख्य दर्शन का स्वरूप विशुद्ध रूप से द्वैतवादी है, जो दो परम सत्ताओं – पु...