Q1. 1947 के बाद भारत में राज्य राजनीति के विकास की ऐतिहासिक रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए। राज्य-स्तरीय राजनीतिक संरचनाओं में समय के साथ क्या परितर्वन आए हैं?
- 1947 के बाद कांग्रेस का प्रारंभिक प्रभुत्व भाषाई पुनर्गठन (जैसे आंध्र प्रदेश 1953) के साथ समाप्त हुआ।
- 1967 के बाद क्षेत्रीय दलों का उदय हुआ, जिसने केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव और गठबंधन राजनीति को बढ़ावा दिया।
- 1980 के दशक में जाति, धर्म और क्षेत्रीय पहचान पर आधारित राजनीतिक लामबंदी ने राज्य राजनीति को गहरा प्रभावित किया।
- 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण ने 'प्रतिस्पर्धी संघवाद' को जन्म दिया, जिससे राज्यों की आर्थिक भूमिका बढ़ी।
Answer: 1947 के बाद भारत में राज्य राजनीति का विकास एक जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया रही है, जिसमें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे गए हैं। प्रारंभिक दशक, जिसे 'एक-दलीय प्रभुत्व' के युग के रूप में जाना जाता है, कांग्रेस पार्टी का केंद्र और अधिकांश राज्यों में वर्चस्व था। इस अवधि में राज्यों का भाषाई पुनर्गठन (जैसे आंध्र प्रदेश 1953, महाराष्ट्र और गुजरात 1960) एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन था, जिसने क्षेत्रीय पहचानों को मजबूत किया और राज्य-स्तरीय राजनीतिक संस्थाओं को उनकी...