Q1. भारत के विश्व-दृष्टिकोण के विकास की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।
- भारत का विश्व-दृष्टिकोण 'वसुधैव कुटुम्बकम्' पर आधारित है, जो सार्वभौमिक शांति और सह-अस्तित्व पर बल देता है।
- प्राचीन भारत में अहिंसा, सर्वधर्म समभाव और आध्यात्मिक मूल्यों ने इसके वैश्विक विचारों को आकार दिया।
- औपनिवेशिक काल में राष्ट्रवाद और गांधीवादी अहिंसक संघर्ष ने आत्मनिर्णय की भावना को जन्म दिया।
- स्वतंत्रता के बाद, गुटनिरपेक्षता भारत की विदेश नीति का आधार बनी, जिसने स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता दी।
Answer: भारत का विश्व-दृष्टिकोण, उसकी प्राचीन सभ्यता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक अनुभवों का एक अद्वितीय संगम है। इसका विकास सदियों से होता रहा है, जिसमें विभिन्न कालों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और यह लगातार बदलते वैश्विक परिदृश्य के साथ अनुकूलन करता रहा है। भारत की विदेश नीति इसी गहरे बैठे विश्व-दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है। प्राचीन काल से ही भारत का विश्व-दृष्टिकोण उदार और समावेशी रहा है। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (विश्व एक परिवार है) का सिद्धांत इसकी आधारशिला है, जो सार्वभौमिकता, शांतिपूर्ण सह...