Q1. अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में यथार्थवादी दृष्टिकोण की व्याख्या कीजिए।
- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में यथार्थवाद एक प्रमुख सिद्धांत है जो शक्ति और राष्ट्रीय हित पर केंद्रित है।
- यह दृष्टिकोण अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को अराजक मानता है, जहाँ कोई केंद्रीय विश्व सरकार नहीं है।
- राज्य प्राथमिक अभिनेता हैं जो अपनी सुरक्षा और अस्तित्व के लिए आत्मनिर्भरता (self-help) पर निर्भर करते हैं।
- हंस मॉर्गेन्थाऊ ने शास्त्रीय यथार्थवाद को व्यवस्थित किया, जो मानव स्वभाव को स्वार्थी मानता है।
Answer: अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में यथार्थवादी दृष्टिकोण एक प्रमुख सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य है जो राज्यों के व्यवहार और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की प्रकृति को समझने पर केंद्रित है। यह दृष्टिकोण इस मूलभूत धारणा पर आधारित है कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति अनिवार्य रूप से शक्ति के लिए संघर्ष है, जहाँ राज्य अपने राष्ट्रीय हितों को अधिकतम करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं। इसका मूल विचार अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की अराजक प्रकृति पर आधारित है, जहाँ कोई केंद्रीय अधिकार या विश्व सरकार नहीं है जो राज...