Q1. बृहत्संहिता का विस्तार से वर्णन कीजिए।
- बृहत्संहिता (6वीं सदी) वाराहमिहिर द्वारा रचित एक विशाल ज्योतिषीय व वैज्ञानिक ज्ञानकोश है।
- यह 106 अध्यायों में खगोल विज्ञान, शकुन, वास्तुशास्त्र, रत्न-परीक्षण, जल-विज्ञान जैसे विषयों को समेटे है।
- इसमें मौसम भविष्यवाणी, विशेषकर वर्षा का पूर्वानुमान, बादलों व वायु के लक्षणों के आधार पर किया गया है।
- शकुन विचार में पशु-पक्षियों की गतिविधियों और शरीर चिह्नों से शुभ-अशुभ फल बताए गए हैं।
Answer: बृहत्संहिता भारतीय ज्योतिष एवं प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वृहद ग्रंथ है, जिसकी रचना छठवीं शताब्दी ईस्वी में महान ज्योतिर्विद् वाराहमिहिर ने की थी। यह ग्रंथ केवल फलित ज्योतिष तक सीमित न रहकर खगोल विज्ञान, मौसम विज्ञान, वास्तुशास्त्र, शकुन विचार, रत्न-परीक्षण, जल-विज्ञान, और अन्य विविध विषयों का एक विशाल ज्ञानकोश प्रस्तुत करता है। इसकी encyclopedic प्रकृति इसे 'संहिता' वर्ग के ग्रंथों में अद्वितीय बनाती है। वाराहमिहिर का परिचय आचार्य वाराहमिहिर उज्जैन के एक प्रसिद्ध...