Qखण्ड-1.1. अहर्गण किसे कहते है? इसके स्वरूप एवं साधन की विवेचना कीजिए।
- अहर्गण: एक निश्चित युग के आरंभ से इष्टकालिक क्षण तक व्यतीत हुए सावन दिनों की कुल संख्या।
- यह भारतीय ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति, तिथि, नक्षत्र आदि सभी पंचांगीय गणनाओं का मूल आधार है।
- गणना का आरंभ कलियुगारंभ या शकारंभ जैसे किसी निश्चित युग के आरंभ (epoch) से होता है।
- साधन प्रक्रिया में सौर वर्ष के दिन, अधिमास (intercalary month) और क्षय तिथि (omitted lunar day) के सुधार शामिल हैं।
Answer: अहर्गण (Ahargana) शब्द का शाब्दिक अर्थ 'दिनों का समूह' या 'गत दिनों की संख्या' है। ज्योतिषीय गणनाओं में, अहर्गण एक निश्चित युग के आरम्भ (epoch) से लेकर किसी इष्टकालिक (desired time) क्षण तक व्यतीत हुए सावन दिनों (civil days) की कुल संख्या को दर्शाता है। यह भारतीय ज्योतिष और खगोल विज्ञान में ग्रहों की स्थिति, तिथि, नक्षत्र, योग और करण जैसी सभी पंचांगीय गणनाओं का मूल आधार है। अहर्गण एक प्रकार का कालमान है जो समय को एकरेखीय तरीके से मापने का कार्य करता है। यह जटिल खगोलीय गतियों को एक सरल, संख्यात्...