Q1. निम्नलिखित में से किन्हीं दो की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिएः
- (क)) रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न देख पड़े थे। वह सोचने लगी- हाय! कितनी निर्दय हूँ। जिसकी सम्पत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति ! और मेरे कारण! हे दयामय भगवान् मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन पाया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिए; परंतु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाये, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण तो, यह वृद्ध असहाय है। (250 words)
- (ख)) वंशीधर ने अलोपीदीन को आते देखा तो उठ कर सत्कार किया; किंतु स्वाभिमान सहित। समझ गए कि यह महाशय मुझे लज्जित करने और जलाने आये हैं। क्षमा-प्रार्थना की चेष्टा नहीं की; वरन् उन्हें अपने पिता की यह ठकुरसुहाती की बात असह्य-सी प्रतीत हुई। पर पंडित जी की बातें सुनीं तो मन की मैल मिट गयी। पंडित जी की ओर उड़ती हुई दृष्टि से देखा। सद्भाव झलक रहा था। गर्व ने लज्जा के सामने सिर झुका दिया। शर्माते हुए बोले- यह आपकी उदारता है जो ऐसा कहते हैं। मुझसे जो कुछ अविनय हुई है उसे क्षमा कीजिए। मैं धर्म की बेड़ी में जकड़ा हुआ था, नहीं तो वैसे मैं आपका दास हूँ। जो आज्ञा होगी, वह मेरे सिर-माथे पर। (250 words)
- (ग)) स्त्रियाँ गा रही थीं, बालक उछल रहे थे। और पुरुष अपने अँगोछों से यात्रियों को हवा कर रहे थे। इस समारोह में नोहरी की ओर किसी का ध्यान न गया, वह अपनी लठिया पकड़े सब के पीछे सजीव आशीर्वाद बनी खड़ी थी। उसकी आँखे डबडबायी हुई थीं, मुख से गौरव की ऐसी झलक आ रही थी मानों वह कोई रानी है, मानों यह सारा गाँव उसका है, वे सभी युवक उसके बालक हैं। अपने मन में उसने ऐसी शक्ति, ऐसे विकास, ऐसे उत्थान का अनुभव कभी न किया था। (250 words)
- 'बूढ़ी काकी' में रूपा का पश्चाताप वृद्धों की उपेक्षा और मानवीय संवेदना के जागरण को दर्शाता है।
- 'नमक का दरोगा' में वंशीधर की ईमानदारी धन पर नैतिक मूल्यों की श्रेष्ठता को स्थापित करती है।
- 'सद्गति' में नोहरी का आंतरिक गौरव दलित वर्ग के आत्म-सम्मान और सामुदायिक जुड़ाव की भावना व्यक्त करता है।
- प्रेमचंद की कहानियाँ भारतीय समाज के यथार्थ, नैतिक मूल्यों और मानवीय मनोभावों का गहरा चित्रण करती हैं।
Answer: प्रेमचंद की कहानियाँ भारतीय समाज के यथार्थ, मानवीय मनोभावों और नैतिक मूल्यों का सजीव चित्रण प्रस्तुत करती हैं। प्रस्तुत प्रश्न में तीन महत्वपूर्ण गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या पूछी गई है, जो प्रेमचंद की विभिन्न कहानियों - 'बूढ़ी काकी', 'नमक का दरोगा' और 'सद्गति' - से लिए गए हैं। ये अंश पात्रों के अंतर्द्वंद्व, सामाजिक परिस्थितियों और उनके हृदय परिवर्तन को गहराई से दर्शाते हैं।