Q1. 'कथा' की नई अवधारणा पर प्रकाश डालिए।
- कथा की नई अवधारणा घटना-प्रधानता से हटकर भाव और बोध की प्रामाणिकता पर केंद्रित है।
- यह मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद पर बल देती है, पात्रों के आंतरिक द्वंद्वों और जटिलताओं का चित्रण करती है।
- नए कथा स्वरूप में रेखीय कथानक की बाध्यता नहीं होती, शिल्पगत प्रयोग जैसे चेतना-प्रवाह देखे जाते हैं।
- इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पाठक को जीवन के गूढ़ सत्यों और विशिष्ट अनुभूतियों से जोड़ना है।
Answer: एमएचडी-09 पाठ्यक्रम के अनुसार, 'कथा' की नई अवधारणा पारंपरिक कथाओं से महत्वपूर्ण रूप से भिन्न है। जहाँ पारंपरिक कथाएँ मुख्य रूप से घटना-प्रधान, नैतिक उपदेश देने वाली और मनोरंजन पर केंद्रित होती थीं, वहीं आधुनिक कथा ने अपने स्वरूप, उद्देश्य और शिल्प में गहरा बदलाव किया है। इसका केंद्रबिंदु अब बाहरी घटनाओं की बजाय व्यक्ति के आंतरिक जीवन और अनुभूतियों पर है। आधुनिक कथा अब केवल घटनाओं का वर्णन नहीं करती, बल्कि जीवन के गूढ़ सत्यों, मनोवैज्ञानिक जटिलताओं और अस्तित्ववादी प्रश्नों को खंगालती है। यह कहान...