Q1. हिंदी के विचारकों एवं आलोचकों के काव्य लक्षण संबंधी विचारों पर सोदाहरण प्रकाश डालिए।
- शुक्ल: काव्य 'लोकमंगल' हेतु 'भावों का उत्कर्ष' है, हृदय की मुक्त दशा को साधता है।
- द्विवेदी: काव्य 'मनुष्यता की समग्र अभिव्यक्ति' है, सौंदर्यबोध व जीवन-दृष्टि का समन्वय।
- डॉ. नगेंद्र: काव्य 'रसात्मक शब्दार्थ' है, जिसकी आत्मा 'रस' है, रस की अनुभूति चरम लक्ष्य।
- वाजपेयी: काव्य 'कलात्मक सौंदर्य की अभिव्यक्ति' है, कवि की अनुभूति और कलात्मक नियोजन पर बल।
Answer: हिंदी साहित्य में काव्य लक्षण, यानी काव्य के स्वरूप और उसकी विशेषताओं को लेकर, विभिन्न विचारकों और आलोचकों ने अपने मौलिक मत प्रस्तुत किए हैं। ये मत काव्य के उद्देश्य, उसके प्रभाव और उसकी आंतरिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण हैं। संस्कृत काव्यशास्त्र की परंपरा से प्रभावित होते हुए भी, इन हिंदी आलोचकों ने आधुनिक संदर्भों और अपनी विचारधारा के अनुरूप काव्य की नई परिभाषाएँ गढ़ी हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल काव्य को 'भावों का उत्कर्ष' और 'हृदय की मुक्त दशा' का साधन मानते हैं। उनके अनुसार, काव्य का प्र...