Q1. 'गोदान' के आधार पर प्रेमचंद की जनतांत्रिक दृष्टि का सोदाहरण विवेचन कीजिए।
- प्रेमचंद की जनतांत्रिक दृष्टि 'गोदान' में शोषित ग्रामीण जनता के अधिकारों पर केंद्रित है।
- होरी भारतीय किसान का प्रतीक है, जो महाजनों और जमींदारों के शोषण का शिकार होता है।
- उपन्यास सामंती (जमींदारी) और उभरते पूंजीवादी शोषण दोनों की क्रूरता को उजागर करता है।
- धनिया और झुनिया जैसी महिला पात्र अन्याय के खिलाफ मुखर प्रतिरोध का प्रतिनिधित्व करती हैं।
Answer: प्रेमचंद का उपन्यास 'गोदान' उनकी गहन जनतांत्रिक दृष्टि का जीवंत उदाहरण है, जो भारतीय ग्रामीण समाज के यथार्थ को अत्यंत मार्मिकता से प्रस्तुत करता है। इस कृति के माध्यम से प्रेमचंद ने शोषित और वंचित वर्ग की पीड़ा, उनके संघर्षों और तत्कालीन सामाजिक-आर्थिक संरचना की विसंगतियों को उजागर किया है। उनकी जनतांत्रिक दृष्टि का मूल आधार मानवीय समानता और सामाजिक न्याय की वकालत है, जैसा कि हमारे पाठ्यक्रम में भी विस्तृत रूप से चर्चा की गई है। प्रेमचंद की जनतांत्रिक दृष्टि मुख्य रूप से व्यवस्थागत अन्याय के प्...