Q1. शंकराचार्य के जीवन एवं कर्तृत्व पर निबन्ध लिखिए।
- शंकराचार्य (788-820 ई.) ने 8वीं शताब्दी में अद्वैत वेदान्त दर्शन का प्रतिपादन किया।
- मुख्य सिद्धांत: 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः' (ब्रह्म सत्य, जगत् मिथ्या, जीव ब्रह्म ही है)।
- उन्होंने प्रस्थानत्रयी (उपनिषद, ब्रह्मसूत्र, भगवद्गीता) पर गहन भाष्य (टीकाएँ) लिखे।
- भगवद्गीता भाष्य में कर्मयोग को चित्तशुद्धि का साधन और ज्ञान मार्ग की ओर ले जाने वाला बताया।
Answer: आदि शंकराचार्य भारतीय दर्शन और धर्मशास्त्र के एक ऐसे प्रकाश स्तंभ हैं, जिन्होंने आठवीं शताब्दी ईस्वी में वैदिक परंपरा को पुनर्जीवित किया और अद्वैत वेदान्त के सिद्धांत को स्थापित किया। उनके अल्पकालिक जीवन (लगभग 32 वर्ष) में उन्होंने न केवल गहन दार्शनिक ग्रंथों की रचना की, बल्कि पूरे भारत की यात्रा कर विभिन्न मतों के विद्वानों से शास्त्रार्थ कर सनातन धर्म की प्रतिष्ठा भी की। उनके जीवन और कर्तृत्व का अध्ययन भारतीय आध्यात्मिक चिंतन को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। **शंकराचार्य का जीवन (Life of...