Qखण्ड-1.1. गीता के अनुसार दैवी सम्पत्ति पर निबन्ध लिखिए।
- दैवी सम्पत्ति भगवद्गीता के 16वें अध्याय में वर्णित आध्यात्मिक गुणों का समूह है।
- यह मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति हेतु आवश्यक 26 प्रमुख सद्गुणों का समुच्चय है।
- निर्भयता (अभयम्) पहला और सर्वाधिक महत्वपूर्ण दैवी गुण है, आंतरिक सुरक्षा दर्शाता है।
- ज्ञान, दान, इंद्रिय-निग्रह, यज्ञ, तप, अहिंसा, सत्य, क्षमा आदि इसके प्रमुख घटक हैं।
Answer: IGNOU के पाठ्यक्रम MBG-008 'सम्पद्-श्रद्धा एवं मोक्षसंन्यास योग' के अंतर्गत, श्रीमद्भगवद्गीता दैवी और आसुरी सम्पदाओं का विस्तृत विवेचन करती है। गीता का सोलहवाँ अध्याय, जिसे 'दैवासुरसम्पद्विभागयोग' के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से दैवी सम्पत्ति (दैवीय गुण) का वर्णन करता है। यह अध्याय उन गुणों को विस्तार से प्रस्तुत करता है जो मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति, मोक्ष और दिव्य जीवन की ओर ले जाते हैं, जबकि आसुरी सम्पत्ति व्यक्ति को बंधन और दुर्गति की ओर धकेलती है। दैवी सम्पत्ति से अभिप्राय उन सद्गुणो...