Q1. विराट की वैदिक अवधारणा पर लेख लिखिए।
- विराट: वैदिक अवधारणा का समग्र, प्रकट ब्रह्मांडीय स्वरूप।
- पुरुष सूक्त: ऋग्वेद का मुख्य स्रोत, विराट को आदि पुरुष के रूप में वर्णित करता है।
- सृष्टि उद्भव: विराट आदि पुरुष के एक चौथाई व्यक्त अंश से प्रकट हुआ।
- ब्रह्मांडीय यज्ञ: विराट के बलिदान से सभी लोक, वर्ण व तत्व उत्पन्न हुए।
Answer: विराट की वैदिक अवधारणा भारतीय दर्शन, विशेषकर वेदों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मौलिक संकल्पना है। यह ब्रह्मांड को एक एकीकृत, सर्वव्यापी और चेतन इकाई के रूप में देखने का एक अनूठा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। विराट शब्द 'विराज' से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'विशेष रूप से चमकने वाला', 'विस्तृत रूप से शासन करने वाला', या 'विस्तारित' जो इसकी असीमित विशालता और महिमा को दर्शाता है। विराट को स्थूल ब्रह्म या प्रकट ब्रह्मांड का समष्टिगत रूप माना जाता है। यह वह सार्वभौमिक पुरुष है जिससे संपूर्ण दृश्यमान...