Qखण्ड-1.1. गीता के अनुसार ज्ञानयोग पर प्रकाश डालिये।
- ज्ञानयोग आत्मज्ञान और अंतिम सत्य प्राप्ति का मार्ग है, सांख्य दर्शन पर आधारित।
- मुख्य लक्ष्य अज्ञान दूर कर आत्मा का परमात्मा से अभिन्नता का बोध करना।
- स्थितप्रज्ञ ज्ञानी का लक्षण है: कामना रहित, सुख-दुःख में समान, इंद्रिय संयमी।
- गुणातीत अवस्था में ज्ञानी तीनों गुणों (सत्व, रजस, तमस) के प्रभावों से अप्रभावित रहता है।
Answer: श्रीमद्भगवद्गीता, जो भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, मनुष्य को मोक्ष प्राप्त करने के विभिन्न मार्गों का ज्ञान प्रदान करती है। इन मार्गों में ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग प्रमुख हैं। गीता के अनुसार, ज्ञानयोग वह मार्ग है जो बुद्धि और विवेक के माध्यम से आत्मज्ञान और अंतिम सत्य की प्राप्ति पर केंद्रित है। यह सांख्य दर्शन के सिद्धांतों पर आधारित है, जहाँ आत्मा (पुरुष) और प्रकृति के बीच के भेद को समझना केंद्रीय होता है। ज्ञानयोग का मुख्य उद्देश्य अज्ञान को दूर करके वास्तविक स्वरूप का बोध प्र...