Q1. कर्म की स्वाभाविक स्थिति पर लेख लिखिए ।
- कर्म एक सार्वभौमिक, निष्पक्ष ब्रह्मांडीय नियम है, जो सभी चेतन-अचेतन पर लागू होता है।
- प्रत्येक कर्म कारण-कार्य सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अनिवार्य और अनुरूप फल होता है।
- कर्म और उसका फल अविच्छेद्य हैं; इन्हें अलग नहीं किया जा सकता, फल अवश्यंभावी है।
- कर्म एक स्वतः-संचालित, स्वतः-संतुलित प्रणाली है, जिसे बाहरी नियामक की आवश्यकता नहीं।
Answer: भारतीय दर्शन, विशेषकर वैदिक परंपरा में, 'कर्म' मात्र शारीरिक क्रिया नहीं है, अपितु यह एक गहन ब्रह्मांडीय सिद्धांत है जो सृष्टि के संचालन, जीव के भाग्य और पुनर्जन्म के चक्र को नियंत्रित करता है। कर्म की स्वाभाविक स्थिति उसके अंतर्निहित, अटल और स्वतः-प्रवर्तित गुणों में निहित है जो इसे एक सार्वभौमिक नियम बनाते हैं। यह किसी बाहरी नियामक या न्यायाधीश की आवश्यकता के बिना कार्य करता है, ठीक वैसे ही जैसे प्रकृति के अन्य नियम। कर्म की स्वाभाविक स्थिति का पहला महत्वपूर्ण पहलू उसकी **सार्वभौमिकता (Univer...