Q1. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार का उत्तर 800 शब्दों में दीजिए।
- (क)) भाषा व्यवस्था की संकल्पना का वर्णन कीजिए। (800 words)
- (ख)) ध्वनि की संकल्पना का विस्तृत वर्णन कीजिए। (800 words)
- (ग)) रुप रचना की संकल्पना पर प्रकाश डालिए। (800 words)
- (घ)) प्रोक्ति की संकल्पना का विवेचन कीजिए। (800 words)
- (ड़)) लोकोक्तियों के प्रमुख अभिलक्षणों का वर्णन करते हुए उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डालिए। (800 words)
- (च)) भाषा और समाज के सह–संबंध पर प्रकाश डालिए। (800 words)
- (छ)) कोड मिश्रण का वर्णन करते हुए कोड परिवर्तन पर प्रकाश डालिए। (800 words)
- भाषा व्यवस्था एक सुव्यवस्थित प्रणाली है जिसमें ध्वनि, रूप, वाक्य, अर्थ और प्रायोगिक स्तर परस्पर क्रिया करते हैं।
- ध्वनि की संकल्पना स्वन विज्ञान (भौतिक ध्वनियाँ) और स्वनिम विज्ञान (अर्थ-भेदक ध्वनियाँ) में विभाजित है।
- रूप रचना शब्दों की आंतरिक संरचना, रूपग्राम (सबसे छोटी सार्थक इकाई) और शब्द निर्माण प्रक्रियाओं का अध्ययन है।
- प्रोक्ति वाक्य की सीमाओं से परे जाकर बड़े पाठ्य अंशों की सुसंगति, संसक्ति और संदर्भ-निर्भरता का विश्लेषण करती है।
Answer: IGNOU के EHD-07 पाठ्यक्रम में भाषा संरचना के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यापक चर्चा की गई है। इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत, भाषा को एक व्यवस्थित इकाई के रूप में समझा जाता है, जिसमें ध्वनि, रूप, वाक्य और अर्थ जैसे स्तर एक-दूसरे से गुंथे होते हैं। प्रत्येक स्तर का अपना महत्व और विशिष्ट कार्यप्रणाली होती है, जो मिलकर भाषा को एक प्रभावी संप्रेषण माध्यम बनाती है। यह भी महत्वपूर्ण है कि भाषा केवल एक अमूर्त प्रणाली नहीं है, बल्कि समाज के साथ उसका गहरा संबंध है। समाज भाषा के उपयोग, विकास और विभिन्न रूपों...