Q1. निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 1000 शब्दों में लिखिए।
- (क)) भक्ति आन्दोलन के उदय की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए। (1000 words)
- (ख)) तमिल भक्ति काव्य के प्रमुख वैष्णव कवियों का परिचय दीजिए। (1000 words)
- (ग)) नामदेव के काव्य में अभिव्यक्त समाज पर चर्चा कीजिए। (1000 words)
- (घ)) शंकरदेव के काव्य के सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष पर विचार कीजिए। (1000 words)
- (ड.)) कश्मीरी भक्त कवयित्रि लल्लेश्वरी के रचना कर्म पर चर्चा कीजिए। (1000 words)
- (च)) तुलसी की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए। (1000 words)
- भक्ति आंदोलन का उदय राजनीतिक अस्थिरता, सामाजिक असमानता (जातिवाद), धार्मिक आडंबरों और इस्लामी प्रभाव जैसी बहुआयामी पृष्ठभूमि का परिणाम था, जिसने सरल, भावनात्मक और समावेशी धर्म की आवश्यकता को जन्म दिया।
- तमिल भक्ति काव्य के वैष्णव कवि (अलवार) विष्णु भक्ति को जनभाषा तमिल में प्रचारित करने वाले थे, जिन्होंने 'दिव्य प्रबंधम्' की रचना की और जातिगत बाधाओं को तोड़कर व्यक्तिगत भक्ति पर जोर दिया।
- नामदेव के काव्य में तत्कालीन महाराष्ट्रियन समाज की जातिगत असमानता, धार्मिक पाखंड और अभावग्रस्तता का चित्रण है; उन्होंने विट्ठल भक्ति, सामाजिक समानता और हिंदी-मराठी में सरल वाणी के माध्यम से इन बुराइयों का खंडन किया।
- शंकरदेव ने असम में 'एक शरण नाम धर्म' स्थापित किया, जो एक समतावादी समाज, नाम कीर्तन, सत्रों के माध्यम से सांस्कृतिक एकीकरण और 'अंकिया नाट', 'भओना' जैसी कला शैलियों के विकास पर केंद्रित था।
Answer: मध्यकालीन भारतीय साहित्य में भक्ति आंदोलन का उदय एक युगांतरकारी घटना थी जिसने समाज और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया। यह आंदोलन न केवल धार्मिक पुनर्जागरण था, बल्कि तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों की उपज भी था। प्रत्येक उप-प्रश्न का विस्तृत उत्तर नीचे दिया गया है, जो भक्ति आंदोलन के विभिन्न पहलुओं और प्रमुख कवियों के योगदान पर प्रकाश डालता है। ये उत्तर IGNOU के EHD-04 पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक भाग लगभग 1000 शब्दों में प्रस्तुत किया गया है ताकि वि...