Q1. निम्नलिखित में से किन्हीं तीन गद्याशों की संदर्भ व्याख्या कीजिए।
- (क)) चार दिन तक पलक नहीं झेंपी। बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही। मुझे तो संगीन चढ़ाकर मार्च का हुक्म मिल जाए। फिर सात जर्मनों को अकेला मारकर न लौटूं तो मुझे दरबार साहब की देहली पर मत्था टेकना नसीब न हो। (300 words)
- (ख)) महाराज दहेज की बातचीत ऐसे सत्यवादी पुरुषों से नहीं की जाती। उनसे संबंध हो जाना ही लाख रुपये के बराबर है। मैं इसी को अपना अहोभाग्य समझता हूँ। हां! कितनी उदार आत्मा थी। रुपयें को तो उन्होंने कुछ समझा ही नहीं। तिनके के बराबर की परवाह नहीं की। बुरा रिवाज है, बेहद बुरा! मेरा बस चले तो दहेज लेने वालों और देने वालों को गोली मार दूं फिर चाहे फाँसी ही क्यों न हो जाए ! पूछो आप लड़के का विवाह करते हैं कि उसे बेचते हैं? अगर आपको लड़के की शादी में दिल खोलकर खर्च करने का अरमान है तो शौक से खर्च कीजिए लेकिन जो कुछ कीजिए अपने बल पर। यह क्या कि कन्या के पिता का गला रेतिए! नेचता है, घोर नीचता! मेरा बस चले, तो इन पाजियों को गाली मार दूँ। (300 words)
- (ग)) जी हाँ मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए पास किया है। कोई पाप नहीं किया, चोरी नहीं की और न आपके पुत्र की तरह ताक-झांक कर कायरता दिखाई है। मुझे अपनी इज्जत अपने मान का ख्याल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह नौकरानी के पैरों पर पड़कर अपना मुंह छिपा कर भागे थे। (300 words)
- (घ)) राजनीति? राजनीति ही मनुष्यों के लिए सब कुछ नहीं। राजनीति के पीछे नीति से भी हाथ न धो बैठो, जिसका विश्व मानव के साथ व्यापक संबंध है। राजनीति की साधारण छलताओं से सफलता प्राप्त करके क्षण भर के लिए तुम अपने को चतुर समझ लेने की भूल कर सकते हो। परन्तु इस भीषण संसार में प्रेम करने वाले हृदय को खो देना, सबसे बड़ी हानि है। शकराज! दो प्यार करने वाले हृदयों के बीच में स्वर्गीय ज्योति का निवास है। (300 words)
- (ड.)) यदि हम थोड़ा भी अपनी मनोवृत्ति स्थिर कर अवाक् हो अपने मन के साथ बातचीत कर सकें तो अति भाग्य। एक वाक्शक्ति मात्र के दमन से न जानिए कितने प्रकार का दमन हो गया। हमारी जिह्वा जो कतरनी के समान सदा स्वच्छंद चला करती है। उसे यदि हमने दबाकर काबू में कर लिया वो कोधादिक बड़े-बड़े अजेय शत्रुओं को बिन प्रयास जीत अपने वश की डाला। (300 words)
- लहना सिंह की वीरता और युद्ध लोलुपता ('उसने कहा था') सैन्य कहावतों से व्यक्त होती है।
- प्रेमचंद दहेज प्रथा का तीखा विरोध करते हैं, इसे 'घोर नीचता' बताकर समाज सुधार का आह्वान करते हैं।
- सावित्री 'आधे-अधूरे' में शिक्षित आधुनिक स्त्री की आत्म-सम्मान और पुरुषवादी पाखंड पर चुनौती प्रस्तुत करती है।
- चंद्रगुप्त 'ध्रुवस्वामिनी' में राजनीति से ऊपर प्रेम और नैतिक मूल्यों की श्रेष्ठता को स्थापित करते हैं।
Answer: प्रस्तुत प्रश्न 'EHD-01 - हिंदी गद्य' पाठ्यक्रम से लिया गया है, जिसमें विभिन्न गद्य विधाओं (कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध) के महत्वपूर्ण अंशों की संदर्भ व्याख्या अपेक्षित है। संदर्भ व्याख्या किसी गद्यांश की गहराई को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जिसमें उसके संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या और विशेष साहित्यिक विशेषताओं का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है। नीचे दिए गए प्रत्येक गद्यांश की विस्तृत संदर्भ व्याख्या, निर्धारित शब्द सीमा (प्रत्येक 300 शब्द) का पालन करते हुए, 'subAnswers' खंड में प्रस्तुत क...