Q1. प्राचीन भारत में कालगणना के उपयोगी यन्त्रों के विषय में लिखिये।
- शंकु यन्त्र: लंबवत छड़ी, छाया से समय, दिशा, अक्षांश निर्धारण हेतु प्रयुक्त।
- जलघड़ी (घटिका यन्त्र): जल से भरने वाले कटोरे से सूक्ष्म समय इकाइयों का मापन।
- धूपघड़ी (चक्रयन्त्र/कपालयन्त्र): शंकु के सिद्धांत पर आधारित, चिह्नित डायल से समय दर्शाती थी।
- ज्यामितीय आधार: इन यन्त्रों की कार्यप्रणाली रेखागणित और त्रिकोणमिति पर आधारित थी।
Answer: प्राचीन भारत में कालगणना (समय गणना) का अत्यधिक महत्व था, क्योंकि यह धार्मिक अनुष्ठानों, कृषि चक्रों और खगोलीय प्रेक्षणों के लिए आवश्यक थी। वैदिक काल से ही, भारतीय विद्वानों ने समय को सटीकता से मापने और निर्धारित करने के लिए विभिन्न खगोलीय एवं ज्यामितीय सिद्धांतों पर आधारित उपयोगी यन्त्रों का विकास किया। इन यन्त्रों ने भारतीय ज्योतिष और गणित के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन यन्त्रों में सबसे मौलिक और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला 'शंकु यन्त्र' था, जिसे सरल शब्दों में एक लंबवत छड़ी य...