Q1. योगांगों का विवेचन करें |
- अष्टांग योग महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित योग के आठ अंग हैं, जो आत्मज्ञान की ओर ले जाते हैं।
- यम नैतिक और सामाजिक आचरण के पाँच नियम हैं: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह।
- नियम व्यक्तिगत शुद्धि और आत्म-अनुशासन के पाँच सिद्धांत हैं: शौच, संतोष, तपस, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान।
- आसन शारीरिक स्थिरता और मानसिक शांति के लिए स्थिर व सुखद बैठने की मुद्रा है।
Answer: योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि ने चित्तवृत्तियों के निरोध द्वारा कैवल्य की प्राप्ति के लिए अष्टांग योग (योग के आठ अंग) का विस्तृत विवेचन किया है। ये आठ अंग एक सोपान क्रम में साधक को बाहरी शुद्धि से आंतरिक समाधि तक ले जाते हैं। यह प्रणाली एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित मार्ग प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य आत्मज्ञान की प्राप्ति है। **1. यम (Yama)** यम योग का प्रथम और बाह्य आधार स्तंभ है, जो सामाजिक आचरण और नैतिक मूल्यों को दर्शाता है। यह व्यक्ति के दूसरों के प्रति व्यवहार को नियंत्रित करता है। यम...