QI.1. चार्वाक दर्शन केवल प्रत्यक्ष को ही प्रमाण के रूप में क्यों स्वीकार करता है? इस प्रकार प्रकाश डालिए ।
- चार्वाक दर्शन केवल प्रत्यक्ष (Perception) को एकमात्र वैध प्रमाण मानता है।
- प्रत्यक्ष ही निश्चित, तात्कालिक और अविवादित ज्ञान प्रदान करता है, जो चार्वाक की भौतिकवादी दृष्टि से मेल खाता है।
- अनुमान (Inference) को अस्वीकृत किया जाता है क्योंकि व्याप्ति (अपरिवर्तनीय संबंध) की सार्वभौमिक स्थापना असंभव है, जिससे अनुमानित ज्ञान अनिश्चित रहता है।
- शब्द (Verbal Testimony) को अस्वीकार किया जाता है क्योंकि यह वक्ता की विश्वसनीयता पर निर्भर करता है और प्रत्यक्ष ज्ञान के अभाव में असत्य हो सकता है।
Answer: चार्वाक दर्शन, जिसे लोकायत दर्शन भी कहा जाता है, भारतीय दर्शन की नास्तिक शाखाओं में से एक है जो केवल प्रत्यक्ष (Perception) को ही ज्ञान के वैध साधन (प्रमाण) के रूप में स्वीकार करता है। यह उनकी भौतिकवादी (Materialistic) और अनुभवजन्य (Empirical) विश्वदृष्टि का सीधा परिणाम है। चार्वाक किसी भी ऐसी चीज़ को स्वीकार नहीं करते जिसका अनुभव इंद्रियों द्वारा सीधे न किया जा सके, जैसे आत्मा, ईश्वर, परलोक या अदृष्ट (भाग्य)। चार्वाक दर्शन के अनुसार, 'प्रत्यक्ष' ही एकमात्र प्रमाण है क्योंकि यह हमें तात्कालिक, ...