Qखण्ड- क. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (20X4 = 80)
- 1) अशोक के शिलालेखों में आए हुये प्रशासनिक अधिकारियों का विस्तार से वर्णन करें। (800 words)
- 2) भारत की प्रमुख लिपियां एवं उनकी विशेषतायों का वर्णन करें (800 words)
- 3) गिरनार शिलालेख का विस्तार से विवेचन करें। (800 words)
- 4) लेखन के साधनों का विस्तार से विवेचन करें। (800 words)
- 5) प्राचीन भारतीय कालक्रम का संक्षेप में विवेचन करें (800 words)
- 6) रुद्रदामन के जूनागढ़ शिलालेख का वर्णन करें | (800 words)
- 7) शिलालेख अध्ययन के भौगोलिक महत्व का विवेचन करें। (800 words)
- अशोक के शिलालेख मौर्य प्रशासन के उच्चाधिकारियों जैसे महामात्य, राजुक, प्रादेशिक और युक्तों की भूमिकाओं का विस्तृत वर्णन करते हैं, जो धम्म प्रचार और लोक कल्याण पर केंद्रित थे।
- ब्राह्मी और खरोष्ठी प्राचीन भारत की दो प्रमुख लिपियाँ थीं; ब्राह्मी (बाएँ से दाएँ, अबूगिडा, अधिकांश भारतीय लिपियों की जननी) और खरोष्ठी (दाएँ से बाएँ, अरामाइक प्रभावित, उत्तर-पश्चिमी भारत में प्रचलित)।
- गिरनार शिलालेख स्थल पर अशोक के वृहद शिलालेख, रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख, और स्कंदगुप्त का शिलालेख उपस्थित हैं, जो तीन अलग-अलग कालों के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं।
- लेखन के प्रमुख साधन पत्थर, ताम्रपत्र, भूर्जपत्र, ताड़पत्र और काष्ठपट्टिका थे, जो विभिन्न उद्देश्यों (स्थायित्व, सुगमता) और भौगोलिक क्षेत्रों के अनुसार प्रयुक्त होते थे।
Answer: BSKC-108 पाठ्यक्रम भारतीय पुरालेख, शिलालेख और कालक्रम के अध्ययन पर केंद्रित है, जो प्राचीन भारतीय इतिहास के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह विषय पुरालेखों और शिलालेखों के माध्यम से प्राप्त ऐतिहासिक जानकारी, विभिन्न लिपियों के विकास, कालक्रम की स्थापना की चुनौतियों और लेखन के साधनों जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालता है। अशोक के शिलालेखों से लेकर रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख तक, ये स्रोत हमें प्राचीन भारत की प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, धार्मिक विश्वासों और भौगो...