Q1. न्न्यायालयिक मनोविज्ञान की प्रकृति और विस्तार का वर्णन कीजिए । न्यायालयिक मनोविज्ञान में उप- विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
- न्यायालयिक मनोविज्ञान कानूनी और आपराधिक न्याय प्रणाली में मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का अनुप्रयोग है।
- इसकी प्रकृति अंतःविषयक, अनुप्रयुक्त और वैज्ञानिक है, जो कानूनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है।
- न्यायालयिक मनोविज्ञान का विस्तार पूर्व-परीक्षण, परीक्षण और परीक्षण के बाद के चरणों को कवर करता है।
- पुलिस मनोविज्ञान अधिकारियों के चयन, प्रशिक्षण और कल्याण पर केंद्रित एक उप-विशेषता है।
Answer: न्यायालयिक मनोविज्ञान, जैसा कि हमारे पाठ्यक्रम BPCE-142 में वर्णित है, मनोविज्ञान की एक शाखा है जो कानूनी और आपराधिक न्याय प्रणाली के संदर्भ में मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों, अनुसंधान और प्रथाओं के अनुप्रयोग पर केंद्रित है। इसका प्राथमिक उद्देश्य कानूनी मुद्दों को समझने, उनका मूल्यांकन करने और उनका समाधान करने के लिए मनोवैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग करना है। न्यायालयिक मनोविज्ञान की प्रकृति अत्यधिक अंतःविषयक है, जो मनोविज्ञान, कानून, आपराधिक न्यायशास्त्र और अन्य संबंधित क्षेत्रों से ज्ञान प्राप्त करती है...