Q1. 12वीं से 15वीं शताब्दी तक के भारत के इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए संस्कृत शिलालेखों के महत्व की जाँच कीजिए।
- संस्कृत शिलालेख 12वीं-15वीं शताब्दी के क्षेत्रीय भारतीय इतिहास के प्रमुख स्वदेशी स्रोत हैं।
- वे शासकों की वंशावली, क्षेत्रीय विस्तार और सैन्य अभियानों की जानकारी देते हैं (उदा. विजयनगर)।
- ये भूमि अनुदान, कर प्रणाली और विभिन्न सामाजिक वर्गों पर प्रकाश डालते हैं, दर्शाते हैं कि समाज कैसा था।
- शिलालेख धार्मिक संरक्षण, मंदिर निर्माण, संप्रदायों और सांस्कृतिक गतिविधियों का विवरण देते हैं।
Answer: 12वीं से 15वीं शताब्दी (c. 1206-1550) तक के भारत के इतिहास के पुनर्निर्माण में संस्कृत शिलालेखों का महत्व अद्वितीय है, विशेषकर उन क्षेत्रों के लिए जो दिल्ली सल्तनत के सीधे नियंत्रण से बाहर थे। यद्यपि यह काल मुख्य रूप से फ़ारसी दरबारी इतिवृत्तों के लिए जाना जाता है, संस्कृत शिलालेख स्थानीय और क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं जो अक्सर केंद्रीय दृष्टिकोणों में अनुपस्थित रहते हैं। ये शिलालेख विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं, जैसे भूमि अनुदान पत्र (जैसे ताम्रपत्र), प्रशस्तियाँ (स्तुतिपरक शिलालेख...