Q1. आदिवासी साहित्य की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालिए।
- आदिवासी साहित्य: अस्मिता, पहचान और आत्मसम्मान की सशक्त अभिव्यक्ति।
- जल, जंगल, जमीन: आदिवासी जीवन, संस्कृति और संघर्ष का केंद्रीय आधार।
- शोषण, विस्थापन: बाहरी 'दिक्कुओं' व व्यवस्था के अन्याय का मार्मिक चित्रण।
- प्रतिरोध, आक्रोश: शोषण के विरुद्ध विद्रोह, न्याय की मुखर मांग।
Answer: आदिवासी साहित्य भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण और विशिष्ट अस्मितामूलक विमर्श के रूप में उभरा है। यह साहित्य केवल आदिवासियों के बारे में नहीं, बल्कि स्वयं आदिवासियों द्वारा अपनी पीड़ा, संघर्ष, पहचान, संस्कृति और जीवन-दृष्टि को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। इसका मुख्य उद्देश्य अपनी ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अस्मिता को स्थापित करना और प्रचलित रूढ़ियों एवं पूर्वाग्रहों को चुनौती देना है। आदिवासी साहित्य की प्रवृत्तियाँ उनके विशिष्ट जीवन-दर्शन, प्राकृतिक परिवेश से गहरे जुड़ाव और शोषण के विरुद...