Q1. रीतिकालीन परिस्थितियों पर प्रकाश डालिए।
- मुग़ल साम्राज्य के पतन और छोटे राज्यों के उदय से राजनीतिक अस्थिरता का बोलबाला था।
- समाज सामंती था; राजा और सामंत वर्ग भोग-विलास में लीन थे, जबकि आम जनता अभावग्रस्त थी।
- भक्ति आंदोलन की तीव्रता घटने से धर्म में आडंबर, बाह्याचार और नैतिक मूल्यों का ह्रास हुआ।
- स्त्रियों की दशा दयनीय थी, उन्हें भोग्या समझा जाता था, और पर्दा व सती प्रथा जैसी कुरीतियाँ प्रचलित थीं।
Answer: रीतिकालीन काव्यधारा अपने समय की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का सीधा प्रतिबिंब थी। यह कालखंड, जो मोटे तौर पर संवत् 1700 से 1900 विक्रमी (लगभग 1643 ईस्वी से 1843 ईस्वी) तक फैला हुआ है, कई उथल-पुथल और परिवर्तनों का साक्षी रहा है। इन परिस्थितियों ने तत्कालीन साहित्य के स्वरूप को गहराई से प्रभावित किया। **राजनीतिक परिस्थितियाँ:** रीतिकालीन भारत में मुग़ल साम्राज्य का पतन अपनी चरम सीमा पर था। औरंगज़ेब के बाद केंद्रीय सत्ता कमजोर पड़ गई, जिससे छोटे-छोटे स्वतंत्र राज्य और सामं...