QQ.1. हिंदी की राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक काव्यधारा का उद्भव व विकास पर प्रकाश डालिए।
- राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा का उद्भव भारतेंदु युग में हुआ, जिसने राष्ट्रीय चेतना जगाई।
- भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपनी कविताओं में देश की दुर्दशा और गौरवशाली अतीत का चित्रण किया।
- द्विवेदी युग में मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत-भारती' राष्ट्रीय जागरण का महत्वपूर्ण प्रतीक बनी।
- छायावादोत्तर काल में 'दिनकर', सुभद्रा कुमारी चौहान जैसे कवियों ने स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया।
Answer: हिंदी की राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक काव्यधारा का उद्भव आधुनिक काल में हुआ, जब भारत में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सूत्रपात हुआ। यद्यपि इसकी जड़ें प्राचीन भारतीय साहित्य और मध्यकालीन भक्ति काव्य में देखी जा सकती हैं, जहाँ एक एकीकृत सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों की स्थापना हुई, तथापि इसका स्पष्ट और संगठित स्वरूप भारतेंदु युग में प्रकट हुआ। भारतेंदु युग (लगभग 1857-1900) को इस धारा का वास्तविक उद्भव काल माना जाता है। भारतेंदु हरिश्चंद्र और उनके समकालीन कवियों ने ब्रिटिश शासन के अधीन दे...