Q1. भारत में जीवनपर्यन्त अधिगम के विकास में सामाजिक आन्दोलनों की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
- सामाजिक आन्दोलनों ने भारत में जीवनपर्यन्त अधिगम की नींव रखी, शिक्षा को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण का माध्यम बनाया।
- साक्षरता अभियानों (जैसे NLM, TLC) ने वयस्कों को बुनियादी साक्षरता और सतत सीखने के अवसर प्रदान किए।
- महिला सशक्तिकरण आन्दोलनों ने महिलाओं के लिए शिक्षा और कौशल विकास की पहुँच बढ़ाकर उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया।
- दलित और वंचित वर्ग के आन्दोलनों ने शिक्षा को सामाजिक समानता और आत्म-सम्मान के लिए अनिवार्य उपकरण के रूप में स्थापित किया।
Answer: भारत में जीवनपर्यन्त अधिगम (Lifelong Learning) का विकास एक जटिल प्रक्रिया रही है, जिसमें विभिन्न सामाजिक आन्दोलनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन आन्दोलनों ने शिक्षा को केवल औपचारिक संस्थानों तक सीमित न रखकर, इसे सामाजिक परिवर्तन, सशक्तिकरण और न्याय के एक उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया। इन्होंने वंचित और उपेक्षित वर्गों तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करने की वकालत की, जिससे जीवनपर्यन्त सीखने की अवधारणा को बल मिला। प्रारंभिक सामाजिक सुधार आंदोलनों, जैसे ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और राजा र...