Q1. उचित चित्र देते हुए गाइगर और मार्सडेन केa-प्रयोग की व्याख्या कीजिए।
- गाइगर-मार्सडेन प्रयोग ने परमाणु की आंतरिक संरचना का अध्ययन किया।
- अल्फा कणों की एक किरणपुंज को सोने की पतली पन्नी से गुजारा गया।
- अधिकांश अल्फा कण सीधे निकल गए (परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है)।
- कुछ कण छोटे कोणों पर, बहुत कम बड़े कोणों पर विक्षेपित हुए।
Answer: गाइगर और मार्सडेन ने रदरफोर्ड के मार्गदर्शन में अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग किया, जिसका उद्देश्य थॉमसन के परमाणु मॉडल का परीक्षण करना और परमाणु की आंतरिक संरचना को समझना था। इस प्रयोग में, एक रेडियोधर्मी स्रोत (जैसे पोलोनियम) से उत्सर्जित अल्फा कणों की एक संकीर्ण किरणपुंज को लेड ब्लॉक से गुजारकर एक बहुत पतली सोने की पन्नी पर निर्देशित किया गया था। पन्नी से निकलने के बाद अल्फा कणों का पता लगाने के लिए एक घूमने योग्य जिंक सल्फाइड (ZnS) प्रतिदीप्त पर्दा (fluorescent screen) उपयोग किया गया। जब अल्फा ...